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सीएमएचओ डॉ. राकेश वर्मा को स्टे की जानकारी ही नहीं

7 वर्ष पहले
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कोर्ट के आदेश पर जनप्रतिनिधियों की डिजायर भारी

कार्यालय संवाददाता | गंगापुर सिटी

न्यायालयसे रोक बावजूद चिकित्सा विभाग में कई कार्मिक उच्चाधिकारियों की रहगुजर पर प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। इसके चलते कई स्वास्थ्य केंद्रों पर एक के स्थान पर दो-दो कार्मिक नियुक्त हैं और कहीं पद खाली हैं। इतना होने के बावजूद सीएमएचओ को न्यायालय के आदेशों की जानकारी नहीं है। वहीं जो भी प्रतिनियुक्ति पर हैं, वे सांसद, विधायक और जिला प्रमुख की अभिशंसा पर नियुक्त है।

चिकित्सा विभाग में कार्यरत प्रसाविका कुसुम अस्थाना को महिला एवं बाल विकास विकास में वर्ष 2005 से 2010 तक पांच वर्ष के लिए प्रचेता पद पर प्रतिनियुक्त किया गया था। पांच वर्ष बाद अस्थाना को मूल विभाग में लगाया जाना था, लेकिन ब्लॉक हेल्थ सुपरवाइजर मेल पद के विरुद्ध बीसीएमओ कार्यालय में नियुक्त कर दिया गया। दूसरी ओर मोहचा का पुरा, मोहचा, किशोरपुर, श्यारौली, हीरापुर आदि कई केंद्रों पर प्रसाविकाओं के पद रिक्त हैं। अधिकारियों ने न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करते हुए कई कार्मिकों को प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त कर रखा है। चकछावा उप स्वास्थ्य केंद्र पर मेरी फर्नांडीस के अतिरिक्त पूनम शुक्ला तथा नौगांव में पुष्पा के अतिरिक्त प्रसाविका सुनीता को प्रतिनियुक्त कर रखा है। दो माह पूर्व ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय ने प्रतिनियुक्ति पर लगी प्रसाविकाओं को हटाकर रिक्त पदों पर नियुक्त कर दिया था, लेकिन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने इन आदेशों को निरस्त कर उन्हें अन्य स्थान पर प्रतिनियुक्त कर दिया।

क्या विभाग में कुछ कार्मिक प्रतिनियुक्ति पर हैं?

हांकुछ कार्मिक प्रतिनियुक्ति पर लगा रखे हैं।

बीसीएमओने करीब दो माह पूर्व प्रतिनियुक्त पर लगे कार्मिकों को हटाकर रिक्त पदों पर लगाया लेकिन आपने उन आदेशों को निरस्त क्यों किया?

सांसद,विधायक और जिला प्रमुख की डिजायर थी, तो करना पड़ा।

हाईकोर्ट ने प्रतिनियुक्ति समाप्त करने के आदेश जारी कर रखे हैं, इसके बावजूद ऐसा क्यों?

मुझेन्यायालय के आदेश की जानकारी नहीं है।

क्याजनप्रतिनिधि की डिजायर हाई कोर्ट के आदेश से ऊपर है।

नहीं,ऐसा नहीं है। दरअसल एक सर्कुलर निकला था, जिसमें जनप्रतिनिधियों की डिजायर का ध्यान रखने का उल्लेख था।

क्याआप प्रतिनियुक्ति को न्यायालय के आदेश की अव