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विकास के नाम पर प्रशासन सुस्त

6 वर्ष पहले
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ग्रामपंचायत प्रशासन, राजस्व तथा पुलिस प्रशासन आदि के कार्यों में शिथिलता होने से उपखंड का विकास मंद पड़ा हुआ है। विकास के अभाव में लोगों को सुविधा के नाम पर कुछ भी नजर नहीं आता है।

उपखंड कार्यालय पर सफाई व्यवस्था, गलियों मार्गों का पटाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत प्रशासन के अधीन है, लेकिन सफाई को देखें तो चारों तरफ गंदगी का आलम नजर आता है। गलियों का पटाव देखे तो कही पटाव है तो कही नहीं। जहां पटाव किया गया वह भी फैल गया। इससे घटिया सामग्री लगने का अंदेशा हो रहा है। लोगों को अभी तक पूरी तरह राशन कार्ड ही उपलब्ध नहीं होने से राशन सामग्री लेने में परेशानी हो रही है।

पंचायत का भवन ही क्षतिग्रस्त होने से बैठक के लिए ही वार्ड पंच भटकते हैं। वार्ड पंचों के प्रस्तावित कार्य भी समय पर पूरे नहीं होने से उनको भी परेशानी होती है। पंचायत प्रशासन द्वारा दोनों तरफ नाले बनाने का प्रस्ताव दो वर्ष पूर्व लिया था, लेकिन कार्य आज तक शुरू ही नहीं हुआ है। वहीं गंदे नाले के पानी को भरने वाली तलाई पर दुकानों का निर्माण हो चुका है।

उपखंड के अधीन आने वाले चालीस गांवों में पटवारी भी समय पर नहीं पहुंचते हैं। यहां पुलिस उपाधीक्षक तथा एएसपी सहित कई विभागों के कार्यालय नहीं होने से लोगों को गंगापुर सिटी जाना पड़ता है। जबकि उपखंड स्तर पर पुलिस उपाधीक्षक का कार्यालय अग्निशमन, कृषि कार्यालय, सिंचाई विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग के कार्यालय होना आवश्यक होता है।

पुलिस उपाधीक्षक का पद सृजित होना चाहिए लेकिन अभी तक थाना ही चल रहा है। कहने को तो थाने पर 20 सिपाही, आठ आरएसी के जवान, एक एचएम, एक एएसआई एक एसआई कार्यरत है, लेकिन इलाके के हिसाब से काफी कम पुलिस बल है। राउमावि, राबाउमावि के पास जीप ठेले मोटर साइकिल लगने से रास्ता जाम होने की स्थिति बन जाती है। प्रशासन द्वारा दो आरएसी के जवान लगाए जाते है लेकिन वे व्यवस्था के नाम पर एक दुकान में आकर बैठ जाते है। इस थाने से जुड़े सेवा, श्यारौली, बड़ौली, बड़ौदा, कुसांय, रायपुर ,खण्डीप, फुलवाड़ा पेपट जुड़े हुए है। जहां पर गश्त के अभाव में आए दिन चोरी, मारपीट की घटना होती रहती है। नफरी की कमी से लोगों को परेशानी होती है।