दो सालों से फाइलों में अटका अंडरब्रिज
जान जोखिम में डालकर करते हैं पटरियां पार
अंडरपासमें करीब साढ़े 6 करोड़ रुपए की लागत आएगी और इसका निर्माण रेलवे कराएगी। करीब दो साल पहले रेलवे ने राज्य सरकार के साथ समझौते के तहत अंडरपास बनाने के लिए सहमति तो जता दी लेकिन शर्त यह रखी कि इसके निर्माण में जो लागत आएगी वह राज्य ही सरकार वहन करेगी। रेलवे ने यह लागत 6.5 करोड़ रुपए बताई। हालांकि बजट में मुख्यमंत्री ने बी कैबिन पुलिया के पास रोड अंडरब्रिज निर्माण के लिए राशि की मंजूरी की घोषणा कर दी और घोषणा के बाद आनन-फानन में इसका शिलान्यास भी कर दिया, लेकिन केवल एक पत्थर पर शिलान्यास लिखने के अलावा कोई रोड अंडरब्रिज निर्माण नहीं हुआ है और ही रेलवे की तरफ से, ऐसे अब भी लोगों को जान जोखिम में डालकर पटरियां पार कर आवागमन करना पड़ रहा है और लोगों की वर्षों पुरानी मांग के पूरे होने के आसार दिखाई नहीं दे रहे हैं।
गंगापुर सिटी. रेलवेस्टेशन के पास बनी बी कैबिन पुलिया।
नगर संवाददाता | गंगापुर सिटी
महुकलांऔर गंगापुर को जोड़ने वाली बी केबिन पुलिया से होकर आवागमन के लिए दूर-दूर तक राह आसान होती नजर नहीं रही है।
रेल प्रशासन की अनदेखी और उदासीनता के चलते पटरियां पार करते अब तक कई मासूमों की जिंदगी भेंट चढ़ गई। बार-बार मांग करने और आंदोलन के बावजूद राज्य सरकार और रेल प्रशासन की आंखे नहीं खुली हैं।
इतना ही नहीं कलेक्टर द्वारा बार बार पुलिया निर्माण के लिए पत्र लिखने के बाद अभी तक सरकार ने इस दिशा में कोई उचित कदम नहीं उठाए है, जबकि गंगापुर को महुकलां सहित सपोटरा, करौली क्षेत्र के आसपास के करीब 50 गांवों को जोड़ने के लिए रेलवे स्टेशन बी केबिन के पास बनी रेलवे पुलिया आवागमन के लिए सबसे सुगम और आसान रास्ता है।
गंगापुर महुकलां सहित आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों के आने जाने का एकमात्र रास्ता बी केबिन के पास बनी पुलिया है। पुलिया में अधिकांश समय तक पानी भरा रहने से यहां आवागमन अवरुद्ध रहता है। अब लोगों के पास दो ही रास्ते बचते हैं, या तो करीब तीन किमी का चक्कर लगाकर रेलवे काॅलोनी वाले रेलवे क्रॉसिंग से पटरियां पार करें या जान हथेली पर रखकर सीधे ही पटरियां पार कर लें। थोड़ा समय बचाने और गंतव्य तक जल्दी पहुंचने की जुगत में लोगों को दूसरा रास्ता ज्यादा आसान लगता है, ज्यादातर लोग जान जोखिम में डाल पटरियां पार करते हैं।
अब तक पटरियां पार करते समय कई लोग ट्रेनों की चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके विपरीत शहर और आसपास के क्षेत्रों के ग्रामीण करीब चार दशक से पुलिया के पास रोड अंडर ब्रिज बनाने की मांग कर रहे है और इसके लिए कई बार लोगों ने लिखित मौखिक में रेलवे के उच्चाधिकारियों को ज्ञापन सौंपे। दूसरी तरफ जनप्रतिनिधि भी इस मामले में कोई रूचि नहीं दिखा रहे है।
कईबार आंदोलन, बेअसर
अंडरब्रिजकी मांग करते हुए लोगों ने कई बार आंदोलन किए यहां तक की रेल रोकी लेकिन नतीजा सबके सामने है। इतना ही नहीं रेलवे के उच्चाधिकारियों और मंत्रियों को कई बार ज्ञापन भी सौंपे लेकिन सब बेअसर साबित हुए, रेलवे अंडरब्रिज के मामले में तो सरकार और ही रेलवे ने कोई पहल की। कांग्रेस सरकार के समय बजट में पांच करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि स्वीकृत की घोषणा की थी लेकिन तो आज तक यह राशि ही मिली और ही पुलिया का काम ही शुरू हो पाया।