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50 साल पुराने गांव के कुएं ढहने के कगार पर
पंचायत नहीं दे रही ध्यान, संरक्षण करें तो पेयजल के लिए सकता है उपयोग में
भास्करन्यूज | गुडा बालोतान
निकटवर्तीकंवला गांव के बस स्टैंड स्थित मीठे पानी के कुएं रख रखाव के अभाव में जर्जर हो गए हैं। बारिश के कारण कुएं के आसपास बनी दीवार ढहने के कगार पर है तथा कुएं की हालत जर्जर होने से कभी भी ढह कर हादसे को अंजाम दे सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि कंवला गांव के बस स्टैंड पर स्थित कुएं करीब 50 वर्षों से भी ज्यादा पुराने है। इसमें एक कुआं और एक बेरी है दोनों ही जल स्रोतों में फ्लोराइडमुक्त मीठा पानी उपलब्ध है। पिछले चार पांच वर्षों से बारिश के अभाव में इनका जलस्तर घटने से कुएं का पानी उपयोग में नहीं आने से इसकी सार संभाल नहीं हो रही। कंवला गांव के ग्रामीण सांकलसिंह, भोपालसिंह, ओटसिंह दहिया पदमाराम मीणा ने बताया कि गांव के बस स्टैंड पर स्थित दोनों जल स्रोत पांच दशक पुराने है। उन्होंने बताया कि जब कंवला गंाव में जलदाय विभाग के जलस्रोत उपलब्ध नहीं थे तब ग्रामीण इन्हीं कुओं से रस्सियों की सहायता से पानी सींचकर ले जाते थे। पिछले पांच वर्षों से इन जल स्रोतों का रखरखाव नहीं होने से वर्तमान में कुएं जर्जर अवस्था में पहुंच चुके है। वहीं इस बार हुई तेज बारिश के दौरान कुएं की मिट्टी ढहने के साथ कुएं पर बनी पक्की दीवार ढह चुकी है। पिछले दिनो चितलवाना के पास के गांव में भी एक कुआं ढह जाने से एक बालक की मौत हो गई थी। इसके बावजूद भी प्रशासन ग्राम पंचायत की ओर से कुएं की मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया जा रहा जिससे क्षेत्र में हादसे की आशंका बनी हुई है।
कई गांवों में ओपनवेल (कुआं) बने हुए हैं परेशानी का सबब
दयालपुरागांव में स्थित जलदाय विभाग के जीएलआर के पास भी ओपन वेल (कुआं) है। जिसमें आए दिन कुत्ते बकरी गिरते रहते है। ग्रामीणों ने कई बार ग्राम पंचायत पटवारी को अवगत करवाया मगर सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसी प्रकार हरजी गांव में महादेव मंदिर के पास स्थित आम पेचके के ओपन वेल में भी एक बकरी गिर जाने से ग्रामीणों ने बड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला। थोड़े दिनों पहले ही हरजी गांव के बावरियों के वास में स्थित ओपन वेल में सांड़ गिर जाने पर ग्रामीणों ने बाहर निकाला था। ग्राम पंचायत की ओर से कार्रवाई नहीं करने पर ग्रामीणों ने अपने स्तर पर कुएं को मिट्टी से पाट