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गुलाब बाबा का मेला 6 को

गुलाबपुरा. कस्बे में खारी नदी के तट पर स्थित गुलाब बाबा की धूणी पर मेले के लिए लगने लगे झूले खारी नदी के तट पर बाबा...

Dainik Bhaskar

Oct 04, 2015, 02:55 AM IST
गुलाब बाबा का मेला 6 को
गुलाबपुरा. कस्बे में खारी नदी के तट पर स्थित गुलाब बाबा की धूणी पर मेले के लिए लगने लगे झूले

खारी नदी के तट पर बाबा की धूणी पर होंगे आयोजन, झूले, चकरी रहेंगे आकर्षण

भास्करसंवाददाता | गुलाबपुरा

खारी नदी के तट पर स्थित गुलाब बाबा का एक दिवसीय मेला 6 अक्टूबर को आयोजित होगा। मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। नगर पालिका के सहयोग से मंदिर पर रंग-बिरंगी रोशनी की जा रही है। मेले में डोलर , झूले, चकरी मौत का कुआं आकर्षण रहेंगे। गुलाब बाबा मेले के दूसरे दिन संकट मोचन बालाजी मंदिर पर मेला आयोजित होगा। जिसमें अखाड़ा प्रदर्शन आकर्षण रहेगा। मेले में मौत का कुआं लगाने वाले अजमेर जिले के टांटोटी निवासी पीरू ने बताया कि वे हर साल यहां मेले में पहुंचते हैं। टांटोली गांव में करीब 100 मौत के कुएं हैं। देशभर के विभिन्न शहरों में यहां के मौत के कुओं की डिमांड रहती है। यहां के डोलर की भी काफी डिमांड रहती है।

गुलाबबाबा के नाम से गुलाबपुरा

खारीनदी के तट पर गुलाब बाबा की धूणी के नाम पर कस्बे का नाम गुलाबपुरा हुआ। मेले में श्रद्घालु बाबा की धूणी पर दर्शन करने पहुंचते हैं। जन्म, शादी विवाह आदि मौकों पर कस्बावासी गुलाब बाबा की धूणी पर धोक लगाने पहुंचते हैं। गुलाब बाबा एक सिद्ध संत थे। 500 साल पहले बाबा का जन्म भिनाय के ब्राह्मण परिवार में हुआ था। गोपालक होने से उनमें वैराग्य भाव उत्पन्न हो गया। उन्होंने ब्यावर के पास सोपरा घाटा में साधना कर नाथ संप्रदाय की स्थापना की। गुलाब बाबा ने साधना करते हुए खारी नदी के तट पर डेरा जमाया। प्राचीन मान्यता के अनुसार उदयपुर महाराणा फतह सिंह जब आगूंचा चौकी पर आए और उन्होंने धूणी पर आग जलती देखी तो वे दर्शन के लिए पहुंचे। महाराणा ने सम्मानपूर्वक बाबा को एक दुशाला भेंट किया, लेकिन बाबा ने उसे धूणी में डाल दिया। इस पर महाराणा आग बबूला हो उठे, लेकिन बाबा ने उस धूणी में से एक के बाद एक कई दुशाला निकाल दिए।

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