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जान जोखिम में डाल सफर करने को मजबूर छात्र
वाहनों की छत पर बैठने की मजबूरी
जहाजपुर. निजीबसों में जगह नहीं मिलने से विद्यार्थी रोजाना छत पर बैठकर जान जोखिम में डाल स्कूल जाने को मजबूर हैं। देवली मार्ग पर निजी बसों में ऐसे नजारे प्रतिदिन देखने को मिल रही है। निजी बसों के कंडक्टर अधिक सवारियां लेने की होड़ में सर्दी के बावजूद विद्यार्थियों को छतों पर बिठाते हैं। इससेे झूलते बिजली के तार से कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। यातायात पुलिस कर्मी भी ओवरलोड बसों की अनदेखी कर रहे हैं। इससे निजी बस संचालकों के हौसले बुलंद है। ग्रामीणों ने प्रशासन एवं परिवहन विभाग से ओवरलोड निजी बस संचालकों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
भास्कर न्यूज | बैरां
रायलाके निकट बैरां गांव में रोडवेज बसों का ठहराव नहीं होने के कारण प्रतिदिन स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों को जान जोखिम में डालकर मजबूरन निजी टैक्सियों में यात्रा करनी पड़ रही है। स्कूल प्रधानाचार्य ने प्रशासन एवं परिवहन विभाग से बैरां में रोडवेज बसों के ठहराव की मांग की है।
उल्लेखनीय है कि बेरां में रोडवेज बसों का ठहराव नहीं होने के कारण प्रतिदिन भीलवाड़ा से बिजयनगर-गुलाबपुरा की करीब दो दर्जन से अधिक टैक्सियां चलती हैं। इन टैक्सियों में सवारियां भरने के साथ बाहर भी सवारियां लटकते हुए जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को मजबूर हैं। प्रतिदिन स्कूल आने-जाने वाले विद्यार्थियों को भी जान जोखिम में डालकर अध्ययन के लिए जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि बिजयनगर से भीलवाड़ा के बीच चलने वाली रोडवेज बसों में कई स्थानों पर यात्री चढ़ते उतरते हैं लेकिन बैरां में रोडवेज का ठहराव नहीं होने के कारण यात्रियों को मजबूरन जान जोखिम में डालकर निजी टैक्सियों में यात्रा करनी पड़ रही है। इसी कारण ये टैक्सी चालक मनमानी से सवारियां भरने के साथ मनमाना किराया वसूलते हैं।
^रोडवेजबसों का ठहराव नहीं होने से विद्यार्थियों को टैक्सियों में यात्रा करनी पड़ती है। प्रशासन एवं रोडवेज को बैरां में बसों के ठहराव की व्यवस्था कर राहत देनी चाहिए। -राजेंद्र प्रसाद गग्गड़, प्रधानाध्यापक,माध्यमिक विद्यालय, रायला
बैरां. बसोंकी कमी के कारण टैक्सी के पीछे लटककर स्कूल जाते िवद्यार्थी।