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\"सोच बड़ी बनाने से हर सपना होगा साकार\'

7 वर्ष पहले
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शोभायात्रा निकाल कर किया संतों का स्वागत

गुलाबपुरा.राष्ट्रसंतश्री ललित प्रभ सागर जी महाराज दार्शनिक संत चंद्रप्रभ सागर जी महाराज, मुनि शांतिप्रिय सागर जी महाराज के मंगल प्रवेश पर श्रीराम मंदिर के निकट श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया। गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा का जगह जगह स्वागत किया गया। मुख्य बाजार होते हुए शोभायात्रा रांका निवास पर पहुंची जहां संतों का संजय रांका, राजीव रांका, देवेन्द्र रांका सहित रांका परिवार ने स्वागत कर आशीर्वाद लिया। शोभायात्रा में मिलाप चपलोत, प्रदीप रांका, पारसमल लोढ़ा, मांगीलाल सेठी, धर्मी चंद कावडि़या, संजय रांका सहित श्रद्धालु मौजूद थे।

नफरत के बदले प्यार लौटाना सकारात्मकता

संतने कहा कि किसी के द्वारा अपमानित किए जाने के बावजूद उसको सम्मान देने के लिए तैयार होना सकारात्मक सोच है। प्यार के बदले प्यार और नफरत के बदले नफरत लौटाना सामान्य सोच है, पर नफरत करने वाले को भी प्यार देने का नाम ही सकारात्मक सोच है। मां बाप से अलग होने वाले बेटे बहुओं से संत ने कहा कि कुछ पल सकारात्मक होकर सोचेंगे तब पता चलेगा कि मां बाप ने हमारे लिए कितनी कुर्बानियां दीं, हम छोटी सी बात को लेकर उनसे अलग हो गए। सकारात्मक सोच की आज सबसे ज्यादा जरूरत धर्म एवं समाज को है। धर्म पंथों में बंट गया और समाज जातियों में। परिणाम उसके पीछे इंसान इंसान के बीच दूरियां पैदा हो गई। यह दूरियां सकारात्मक सोच से ही दूर होंगी।

सकारात्मक सोच से मिटेगी दूरियां

संतने कहा कि इंसान की पहचान इंसानियत से होनी चाहिए। कि किसी धर्म, मजहब या जाति से। हम पंथों की दूरियां नहीं मिटा सकते तो क्या उनके बीच द्वार दरवाजे तो खोल ही सकते हैं। सार्वजनिक मैदानों में चातुर्मास ही इसीलिए करते हैं ताकि वहां सब एक दूसरे के करीब सके। हमसे तो अच्छे वे पंछी हैं जो बिना किसी भेदभाव के मंदिर के शिखर पर और मस्जिद की मीनार पर जा बैठते हैं। जिस दिन मुल्ला को मस्जिद में राम और पंडित को मंदिर में रहमान नजर जाएंगे उस दिन हिंदुस्तान का कायाकल्प हो जाएगा।

भास्कर न्यूज|गुलाबपुरा

राष्ट्रसंतललित प्रभ सागर ने कहा कि पांव में पड़ी मोच और दिमाग की छोटी सोच इंसान को कभी आगे बढ़ने नहीं देती। ऊंची सोच इंसान की सबसे बड़ी ताकत है। हमें हर सपने को सकार करने के लिए सोच को भी बड़ा बनाना होगा। व्यक्ति