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मन कर्म को शुद्ध करती है भागवत : प्रेमचंद

7 वर्ष पहले
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श्रीमद्भागवत कथा सुनने मात्र से राजा परीक्षित को जन्म से पूर्व ठाकुरजी के दर्शन हुए थे। कथा सुनने मात्र से ही मनुष्य का मन कर्म का शुद्धिकरण होता है जिससे आत्मा में परिवर्तन होता है। मन को शांति मिलती है। यह बात कस्बे के माहेश्वरी पंचायती नोहरे में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन गुरुवार को आचार्य प्रेमचंद शास्त्री ने परीक्षित जन्म की कथा सुनाते हुए कही।

भागवत का शुभारंभ बुधवार को कलश यात्रा से हुआ। इससे पूर्व बैंडबाजों से भागवत कथा की शोभायात्रा निकाली गई। कथा प्रतिदिन दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक चल रही है। शुक्रवार को कथा में वामन अवतार प्रसंग का वाचन किया जाएगा।