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पशुओं के हवाले की खेतों में खड़ी फसल

7 वर्ष पहले
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इटावा। क्षेत्रमें फसल बर्बाद होने से किसानों ने खेतों में छोड़े जानवर।

इटावा| क्षेत्रके किसानों ने हजारों बीघा हैक्टेयर जमीन में सोयाबीन, उड़द तिल्ली की बुवाई की थी, लेकिन मौसम की मार से काफी फसलें खराब हो गई हैं तथा रही-सही फसल भी अब बिना फलियां आए ही सूखने लग गई है, जिसके चलते किसान खेत हांकने को मजबूर हो गए हैं तथा इन फसलों को पशुओं के लिए छोड़ दिया है।

किसानों ने बताया कि इस बार तिल्ली की फसल नष्ट हो चुकी है तथा सोयाबीन की फसल में बढ़ाव नहीं हो पाने खरपतवार के चलते फलियां तक नहीं आई हैं। अब गर्मी के साथ ही फसलें पीली पड़ती जा रही है।

फसलीबीमा के नाम पर भी किसानों पर मार

रजोपासहकारी अध्यक्ष जोधराज नागर, पीपल्दा अध्यक्ष बंटी दाधीच गणेशगंज सहकारी अध्यक्ष शिवप्रकाश मीणा ने कहा कि पिछले वर्ष 2013 में खरीफ की फसलों में नुकसान को सरकार ने भी मानते हुए किसानों को मुआवजा राशि दी है। बीमा कंपनियों ने सिर्फ नाममात्र का खराबा माना है। ग्राम सेवा सहकारी संस्थाओं द्वारा हजारों किसानों ने अपनी जमीन का एक करोड़ 70 लाख रुपए बीमा कंपनी को प्रीमियम राशि दी थी, लेकिन फसलें नष्ट हो जाने के बाद उनको क्लेम के नाम पर महज 60 लाख की राशि मिली। इसी तरह रबी की फसल में 2 करोड़ 51 लाख की प्रीमियम दी, लेकिन फसलों में लोंगिया रोग ओलावृष्टि के बावजूद भी सिर्फ एक करोड़ एक लाख रुपए क्लेम राशि स्वीकृत हुई है।