पशुओं के लिए पॉलीथिन बन रही है जानलेवा
बार-बार आफरा चढ़ने से हो जाती है पशु की मौत
पशुचिकित्सक राजेन्द्र विजयवर्गीय का कहना है कि पाॅलीथिन पशुओं के लिए बड़ा खतरा बन गई है। पेट में पॉलीथिन जमा होने से पूरा पाचन तंत्र बिगड़ जाता है और श्वांस लेने में दिक्कत होती है। पेट में खाद्य सामग्री तो पच जाती है, लेकिन पॉलीथिन धीरे-धीरे इनके पेट में जमा होती रहती है। एक समय ऐसा आता है, जब पेट में जमा ढेर होने से गैस बनने लगती है, जिससे इन्हें बार-बार आफरा चढ़ने की बीमारी होती है। धीरे-धीरे समस्या बढ़ने पर इनकी मौत हो जाती है।
नहींहो रही न्यायालय के आदेश की पालना
न्यायालयके निर्देश पर सरकार ने पॉलीथिन के उपयोग पर पाबंदी लगा रखी है। वहीं पंचायतों निकायों को यह जिम्मेदारी दी थी कि वह अन्य कचरे में से पॉलीथिन को अलग कर निस्तारण करे तथा खुले में पड़े कचरे तक जाने से जानवरों को रोकने का बंदोबस्त करें, लेकिन क्षेत्र में इसकी कहीं कोई पालना नहीं हो रही है।
भास्कर न्यूज | इटावा
पाॅलीथिनके उपयोग पर पाबंदी के बावजूद भी रोक नहीं लगने से मवेशियों की जान पर बन रही है।
गाय के बछड़ों को पर्याप्त पाौष्टिक आहार नहीं मिलने तथा पशुपालकों द्वारा जानवरों को चराई के लिए खुला छोड़ देने से बाजारों में फैली पॉलीथिन की थैलियां खाकर ये अपना पेट भर रहे हैं। जिससे इनका स्वास्थ्य बिगड़ रहा है तथा यह कमजोर नजर आने लगे हैं। साथ ही मवेशियों के पेट में जाने के बाद पॉलीथिन जानलेवा साबित हो रही है।
चाराकम होने से रही है दिक्कत
ग्रामीणोंने बताया कि एक गाय प्रतिदिन कम से कम तीस से चालीस किलो पदार्थ खाती है, लेकिन वर्तमान में चारे की कमी के कारण पशुपालक गोवंश को खुला छोड़ देते हैं। भूख से इधर-उधर भटकते गोवंश उन जगह पर पहुंच जाते हैं, जहां गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। यहां लोगों द्वारा पॉलीथिन में बांधकर फैंके गए कचरे को खाने के चक्कर में गोवंश पूरी थैली को ही खा जाते हैं।