कथा के शुभारंभ पर निकाली कलश यात्रा
आवां| संगीतमयश्रीमद् भागवत कथा ज्ञानगंगा यज्ञ का शुभारंभ सोमवार को हुआ। कथा का वाचन 15 फरवरी तक पं. मुरारीलाल शर्मा देवली वाले करेंगे। कथा का आयोजन जाटोलिया परिवार द्वारा कराया जा रहा है।
कथा के पूर्व त्रिवेणीधाम श्री नीलकंठ महादेव मंदिर स्थित कुंड से कलशयात्रा निकाली गई, जो कस्बे के प्रमुख मार्गों से होती हुई धाकड़ समाज के द्वारिकाधीश मंदिर पंहुची, जहां से कलश यात्रा श्री द्वारिकाधीश भगवान के देवविमान की शोभायात्रा के रूप में कथा स्थल तक पहुंची एवं पूजापाठ के बाद कथा का वाचन शुरू हुआ।
महाशिवरात्रिपर्व पर आवां में तीन दिवसीय विशाल मेला 17 से
आवां. श्रीबद्रीविशाल भगवान की ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी आवां में महाशिवरात्रि पर्व पर तीन दिवसीय मेला 17 से 19 फरवरी तक लगेगा, जिसमें 17 फरवरी को भगवान के देवविमान की शोभायात्रा त्रिवेणीधाम श्री नीलकण्ठ महादेव मन्दिर तक निकाली जाएगी। जिसके बाद मेले का विधिवत शुभारम्भ होगा।
रात्रि 9 बजे भजन संध्या की प्रस्तुति के बाद मध्यरात्रि में महाकाल का रूद्राभिषेक किया जाएगा। 18 फरवरी को सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं भगवान की झांकियों का प्रदर्शन होगा। 19 फरवरी को भजन संध्या का मनमोहक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा।
अज्ञानरूपीअंधकार को दूर कर प्रकाश पैदा करता है सत्संग
खातौली. क्षेत्रके डाबरसा जाड़वाले हनुमान परिसर चल रही शिव प्राण-प्रतिष्ठा एवं श्रीमद् भागवत सप्ताह के छठे दिन कथा का वाचन करते हुए पंडित नंदलाल गुजराती ने कहा कि सत्संग अज्ञानरूपी अंधकार को दूर करके प्रकाश पैदा करता है। उन्होंने कहा कि क्रोध आज सामान्य समस्या है और इसके कारण ही कई घटनाएं हो रही हैं। मनुष्य को क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए, इसके लिए रोत हरि भजन करें। मनुष्य सत्संग में मन लगाकर ही क्रोध पर विजय पा सकता है। कथा के दौरान भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय बना रहा। कथा के दौरान परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ था।
भागवतसप्ताह ज्ञानयज्ञ के समापन पर निकाली गई शोभायात्रा
इटावा. क्षेत्रके खेड़ली गांव मेें चल रही आठ दिवसीय श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ महोत्सव कथा की पूर्णाहुति सोमवार को हवन महाप्रसाद वितरण के साथ संपन्न हो गई। इस अवसर पर नगर में बैंडबाजों के साथ शोभायात्रा निकाली गई। सुरेंद्र शास्त्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि जो भी पूर्णाहुति की कथा का सच्चे मन से श्रवण कर कथा के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करता है उसको कथा का पूरा फल प्राप्त होता है। प्रेम की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि सच्चे प्रेम में समर्पण की आवश्यकता होती है।