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इटावा तक नहीं चली रात्रि बस

7 वर्ष पहले
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कोटा-इटावामार्ग पर रात्रि बस सेवा को लेकर अरसे में नेताओं ने लोगों को आश्वासन तो खूब दिए, लेकिन वह आश्वासन कोरे ही साबित हुए। रात्रि बस सड़कों पर नहीं दौड़ी। कोटा जिले का इटावा प्रमुख कस्बा है।

यहां की जरूरतों को देखते हुए स्थानीय लोग काफी समय से रात्रि 8 बजे बाद बस चलाने की मांग कर रहे हैं। कई बार जनप्रतिनिधियों को भी अवगत कराया। बीते 10 वर्षों में कांग्रेस भाजपा सरकारों में यातायात मंत्रियों तक के आश्वासनों के बाद भी इस मार्ग पर बस नहीं चल पाई। कोटा जिला मुख्यालय होने के साथ ही व्यापारिक केंद्र होने के कारण रोज काफी संख्या में लोगों का आना-जाना रहता है। रात्रि बस नहीं होने के कारण यात्रियों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ता है। इस मार्ग बस संचालन को लेकर पूर्व उप मुख्यमंत्री स्व. बनवारीलाल बैरवा, पिछली कांग्रेस सरकार में परिवहन मंत्री ने क्षेत्र के लोगों को बस चलाने के आश्वासन तो दिए, लेकिन वह सिर्फ कोरे ही रहे।

कईमार्ग पर बसें बंद, यात्री परेशान

कोटाआगार से इटावा क्षेत्र में संचालित आधा दर्जन से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली बसें काफी समय से संचालित नहीं होने के कारण यात्रियों को परेशान होना पड़ रहा है। कोटा से कैथूदा बस भी बंद है। कोटा-दुर्जनपुरा मार्ग पर दो बसें संचालित होती हैं। कोटा-गेंता मार्ग पर तीन बसें संचालित होती थीं, लेकिन वर्तमान में एक ही बस संचालित हो रही है। कोटा से बागली मार्ग पर चलने वाली रोडवेज बस भी संचालित नहीं हो पा रही है। कोटा से ढीपरी चंबल मार्ग पर आज तक एक भी बस संचालित नहीं हो पाई।

जर्जरबसों में यात्रा करना आसान नहीं

कोटा-इटावा-श्योपुरमार्ग पर रोडवेज की बसें संचालित हैं, लेकिन यह बसें जर्जर अवस्था में होने के कारण यात्रियों को काफी परेशानी होती है। हालात यह है कि बसें कोटा से रवाना होने के बाद खराब हो जाएं, इसका पता किसी को नहीं रहता। इसके बाद यात्रियों को घंटों समय रास्ते में ही गुजारना पड़ता है। यात्रियों का कहना है कि रोडवेज द्वारा इस मार्ग पर नाकारा बसें संचालित की जा रही हैं जिसके कारण परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

अधिकांशमार्गों पर नहीं होता संचालन

इटावाक्षेत्र के ग्राम पंचायत मुख्यालय सड़क से तो जुड़े हुए हैं, लेकिन 50 प्रतिशत से भी अधिक पंचायत मुख्यालयों पर बसों का संचालन नहीं होने के कारण लोगो