इटावा को 13 वर्ष से बाइपास का इंतजार
कस्बेमें बढ़ते यातायात दबाव के चलते स्वीकृत बाइपास रोड 13 वर्ष बाद भी नहीं बन पाने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इन दिनों ट्रैफिक इतना बढ़ गया है कि मुख्य सड़क पर रोजाना 10 से 15 बार जाम लगना आम बात है, लेकिन अब तक इसके निर्माण कार्य को गति नहीं मिल पाई है। कस्बे में 8 मार्च 2000 को इटावा में 3 किलोमीटर कोटा रोड सूखनी नदी से खातौली रोड नहर के पास तक का स्वीकृत हुआ था, जिसके लिए साढ़े 8 करोड़ रुपए का तखमीना तैयार कर पीडब्ल्यूडी द्वारा जमीन को 10 वर्ष पूर्व अवाप्त कर मालिकों को इसका मुआवजा भी दिया जा चुका है तथा 9 वर्ष पूर्व विभाग द्वारा बीओटी योजनांतर्गत बाइपास के लिए निविदा भी निकाली, लेकिन इसमें किसी भी ठेकेदार द्वारा रुचि नहीं लेने से काम ठंडे बस्ते में चला गया। उसके बाद पंचायत द्वारा मनरेगा योजना में 5 वर्ष पूर्व करीब 84 लाख रुपए स्वीकृत कर मिट्टी डलवाने का कार्य करवाया, लेकिन इसमें भी अतिक्रमण की बाधा सामने आने से कार्य पूर्ण नहीं हो सका। इसके बाद पंचायत पीडब्ल्यूडी द्वारा इसकी सुध नहीं लेने से यह मार्ग कई स्थानों से क्षतिग्रस्त हो गया तथा ग्रामीण रोड पर डाली गई मिट्टी भी खोदकर ले जा रहे हैं।
बाइपास की सड़क पर की जा रही है खेती
पंचायतद्वारा बाइपास पर ग्रेवल सड़क बनाई थी। उसका भी अस्तित्व धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। यहां पर एक दो स्थानों पर खेत मालिकों ने बाइपास सड़क को हांककर उसमें खेती करने की तैयारी शुरू कर दी है, जिससे अब बाइपास रोड खेत में तब्दील होता दिखाई दे रहा है।
कस्बे में लगता है रोजाना जाम
कस्बेमें बाइपास रोड के अब तक अधूरा पड़ा होने कस्बे का मुख्य मार्ग तंग होने से रोजाना जाम लग रहा है। कस्बे से रोजाना 2 से 3 हजार वाहनों का रोजाना आवागमन होता है तथा यहां पर कृषि मंडी होने से सैकड़ों बड़े वाहन जिंसों से भरकर गुजरते हैं, जिसके चलते दो बड़े वाहन मुख्य सड़क पर एक साथ जाने पर जाम लग जाता है।
अतिक्रमियोंके खिलाफ करेंगे कार्रवाई
बाइपासके बारे में पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन जेपी गुप्ता ने बताया कि कस्बे में स्वीकृत बाइपास के नवीन बजट के प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेजे हैं। साथ ही जो अतिक्रमण की समस्या रही है, उसको दूर कर सड़क को काटकर खेती कर रहे लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
कईग्रेवल सड़क मार्ग भी अधूरे
इटाव