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आनंद से जीना चाहिए

7 वर्ष पहले
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इटावाकी त्यागी धर्मशाला में चल रहे ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय महाविद्यालय के आध्यात्मिक प्रवचनों के अंतिम दिन बहन उर्मिला, नीलू, प्रीति भाई पवन ने जीवन को आध्यात्मिक तरीके से जीने के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि जीवन के हर क्षण को आनंद से जीना चाहिए तथा अपना जीवन सदैव ईश्वर वंदना जनकल्याण के कार्यों में समर्पित करना चाहिए। उन्होंने युवा पीढ़ी को संदेश देते हुए कहा कि आज के युवा पाश्चात्य संस्कृति में डूबते जा रहे हैं। इससे भारतीय संस्कृति का अपमान हो रहा है। सारा दोष युवा पीढ़ी का भी नहीं है।

उनके माता-पिता परिवार वालों का भी दोष है। यदि माता-पिता अपने बच्चों को संस्कारवान बनाना चाहते हैं तो बाल्यावस्था से ही उन्हें भारतीय संस्कृति का ज्ञान दें। बालक की प्रथम पाठशाला घर, परिवार ही होता है। उन्होंने कहा कि कभी अपने मन में किसी के प्रति बुरी सोच मत रखो।

दुनिया में बुराइयां इसलिए नहीं हैं कि बुरे आदमी ज्यादा बोलते हैं, बल्कि इसलिए हैं कि भले आदमी समय पर चुप रह जाते हैं। आज हमने गलत को गलत कहने की हिम्मत खो दी है। इस हिम्मत को हमें बरकरार रखना होगा। ईमानदार और साहसी लोगों के द्वारा ही देश का कायाकल्प संभव है। उन्होंने कहा कि देश में बहुत से लोग ईमानदार हैं, लेकिन ईमानदार होना ही पर्याप्त नहीं है। इसके साथ हिम्मत और साहसी होना भी आवश्यक है।

इटावा. कस्बे में आयोजित आध्यात्मिक प्रवचन में मौजूद श्रद्धालु।

- रामगंजमंडी। गोरधनपुरा माताजी मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार को कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया।