मनुष्य कर रहा प्रकृति से खिलवाड़
क्षेत्रके खंडगांव में संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दौरान मंगलवार को पं. मुकुट बिहारी शास्त्री ने कहा कि मनुष्य के द्वारा प्रकृति से खिलवाड़़ किया जा रहा है। जिसके फलस्वरूव बिना समय वर्षा होना, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि आदि का प्रकोप मनुष्य को झेलना पड़ रहा है। प्रचीनकाल में गाय के घी से ऋषियों द्वारा हवन किया जाता था, जिससे बादल बनते थे और समय पर बारिश होती थी। सतयुग में राम राज्य में मांगने पर बारिश होती थी। प्राचीनकाल में देश में दूध-दही की नदियां बहती थी।
वर्तमान में एक बालक थैली पाउडर का दूध पीकर अपने दिन की शुरुआत करता है। ऐसे दूध से मनुष्य का शरीर हड्डियां कमजोर होती जा रही हैं। उन्होंने महर्षि दधीचि का दृष्टांत सुनाते हुए कहा कि वे गाय के दूध का सेवन करते थे, जिससे उनकी हड्डियां वज्र के समान कठोर हो गई थी। इन्द्र ने दधीचि की हड्डियों का वज्र बनाकर राक्षस का वध किया था। मदिरा पान, मांसाहार, दुर्व्यसनों का सेवन करने वाला व्यक्ति अपनी चाल को बिगाड़ रहा है, जिसके परिणाम उसे कष्ट सहकर भुगतने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य को विद्या, बुद्धि, शील आदि गुणों को अपनाना चाहिए। बुद्धि का उपयोग दूसरों के कष्ट दूर करने के लिए किया जाना चाहिए। सुआचरण वालों का संग हमेशा जीवन को सुखद बनाता है। इंसान से शैतान बनने के लिए तो कुसंग की आवश्यकता होती है, परंतु इंसान से भगवान बनने के लिए सत्संग की आवश्यकता होती है। उन्होंने कथा को सबसे बड़ा सत्संग बताया। कथा के अंत में आरती उतारी गई एवं प्रसाद वितरण किया गया।
कथादूर करती है मानव जीवन की व्यथा
इटावा/पीपल्दा. भगवानकी कथा मानव जीवन की व्यथा दूर करती है, इसलिए कष्टों से मुक्ति पाना है तो भगवान के चरणों में उनकी कथा सुनने में मन लगाएं। यह उद्गार क्षेत्र के डूंगरली गांव में चल रही भागवत कथा में मंगलवार को आचार्य शरदेन्दु द्विवेदी सुदामा गोविन्ददास ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यमुना में यम द्वितीया को स्नान करने से यमलोक से मुक्ति मिलती है और राधा का ध्यान करने से उसे बैकुंठ धाम प्राप्त होता है। संसार में सबसे बहुमूल्य संपदा संतोष धन है। यह धन जिसने भी प्राप्त कर लिया वह संसार का सबसे धनी व्यक्ति कहा जा सकता है। आज का मनुष्य धन के पीछे दौड़ रहा है और सुख-शांति से दूर होता जा रहा है। जहां लोभ है वहां सुख, आनंद नहीं हो सकता। इसलि