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अस्पताल में बढ़े रोगी डॉक्टरों के पद खाली
उपखंडक्षेत्र में एक सप्ताह से सर्दी के जोर पकड़ने से अस्पतालों में सर्दीजनित बीमारियों से पीड़ितों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। इन दिनों दिन रात के तापमान में रोजाना रहे अंतर से सर्दीजनित बीमारियों को बढ़ावा मिल रहा है। इस कारण राजकीय और निजी अस्पतालों में मरीजों की तादाद बढ़ गई है। उपचार के लिए डॉक्टरों के पास मरीजों की कतारें देखी जा सकती हैं। इंडोर में भी मरीजों से अस्पताल के बेड भरे पड़े हुए हैं।
मौसम परिवर्तन से लोग सर्दी, खांसी, जुकाम एवं वायरल बुखार से पीड़ित हो रहे हैं। आउटडोर में मरीजों की संख्या 200 से बढ़कर 350 तक जा पहुंची है। सर्दीजनित बीमारियों के बढ़ने से दवा एवं पर्ची काउंटरों पर मरीजों की भीड़ आसानी से देखी जा सकती है। डॉ. केसी शर्मा राजेश वृंदवानी ने बताया कि इन दिनों दिन में गर्मी रात में ठंडक का असर बच्चों के शरीर पर ज्यादा पड़ता है। ऐसा मौसम वायरस कीटाणुओं के पनपने के लिए अनुकूल माना जाता है। इस मौसम में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। बच्चों में जुकाम, खांसी के साथ पसली चलने अस्थमा अटैक होता है। चिकित्सकों ने बताया कि सात दिन पहले आउटडोर में प्रतिदिन औसतन 10 बच्चे विभिन्न प्रकार की बीमारियों से पीड़ित आते थे, लेकिन अब प्रतिदिन आउटडोर में 20 से 25 बच्चे बीमारियों से पीड़ित रहे हैं।
डॉ. ओपी मीणा ने बताया कि मौसम परिवर्तन लोगों की सेहत को काफी प्रभावित करता है। इसके चलते रोगियों की संख्या एकाएक बढ़ जाती है। दिन और रात के तापमान में हो रहे उतार-चढ़ाव से खांसी और जुकाम होने की आंशका रहती है।
महिलारोग विशेषज्ञ नहीं, जाना पड़ता हैं कोटा
इटावाराजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र का सबसे बड़ा चिकित्सालय होने के अलावा जिला मुख्यालय से 80 किमी से ज्यादा दूरी है, लेकिन यहां काफी समय से महिला रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, सर्जन तथा निश्चेतक का पद खाली है। इस कारण उपचार कराने वाली महिलाओं को विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा चिकित्सालय में शिशु वार्ड तो बन गया, लेकिन शिशु रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त होने से वार्ड में भर्ती करने में परेशानी होती है।