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मुट्ठी बांधे आए और खाली हाथ जाना है: स्वस्ति भूषण

6 वर्ष पहले
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कोटड़ी श्याम को लगाया छप्पनभोग

सत्यसे सबका साक्षात्कार हो कि मुट्ठी बांधे आए हो और हाथ पसारे जाना है। यानी धरती पर जन्म लेने के बाद मानव मुट्ठी से पुण्य संचय कर लाते हैं और खर्च हो जाने पर हाथ खाली हो जाता है। इस बात को हमेशा याद रखना चाहिए। यह विचार आर्यिका स्वस्ति भूषण माता ने व्यक्त किए। वे मंगलवार को स्वस्तिधाम में धर्मसभा में बोल रही थीं।

भारत भूमि वह है जहां र| तो निकलते ही हैं पर साधु भी यहां जन्म लेते हैं इसलिए इस धरा को र|गर्भा कहा गया है। भगवान श्री आदिनाथ ने तीन लोक की श्रेष्ठ संपदा को तिनके के समान छोड़ दिया था। महावीर स्वामी ने राजतिलक को अस्वीकार करना ही श्रेष्ठ समझा। यह वही धरती है जहां कुरूक्षेत्र के मैदान में कौरव-पांडव में महाभारत का युद्ध हुआ। जिसके परिणाम स्वरूप पांडवों को 14 साल तक वनवास में रहना पड़ा। इससे पहले जयकारों के साथ श्रावक-श्राविकाओं ने माताजी की अगवानी की।

कोटड़ी.छप्पनभोग के अवसर पर मंगलवार को रोशनी से जगमगाता कोटड़ी चारभुजानाथ मंदिर।