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लौद्रवा की धर्म धरा में भक्तिभाव आत्मियता है : शर्मा

7 वर्ष पहले
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बाड़मेरसे 11 दिन पहले रवाना हुआ पैदल संघ रविवार को लौद्रवा तीर्थ पहुंचा। सौम्यगुणा की पावन प्रेरणा निश्रा में कुशल दर्शन मित्र मंडल (ब्रहमसर ग्रुप) बाड़मेर के तत्वाधान में रवाना हुए इस संघ का लौद्रवा तीर्थ पहुंचने पर तीर्थ ट्रस्ट मंडल जैसलमेर महिला मंडल, गांववासियों जैन धर्मावलंबियों द्वारा पद यात्रियों का गाजे-बाजे के साथ सामेला किया गया। इस अवसर पर उमड़़े जन सैलाब से लौद्रवा तीर्थ में दिनभर मेला जैसा माहौल रहा। इस दौरान विभिन्न पूजा अनुष्ठान धार्मिक कार्यक्रम भी हुए।

रविवार सुबह रुपसी गांव से साध्वी सौम्यगुणा, साध्वी संयमप्रभा के सानि में भव्य शोभायात्रा के रुप में जब लौद्रवा तीर्थ पहुंचा तो उत्सव सा माहौल बन गया। लौद्रवा तीर्थ के जिनालय में कसौटी से निर्मित सहस्त्रफणा चिंतामणी पार्श्वनाथ भगवान की मूर्ति के दर्शन कर साध्वी मंडल समस्त संघपति भाव विभोर हो गए। 45 संघपतियों के परिवार सहित पैदल संघ के श्रद्धालुओं ने लौद्रवा तीर्थ स्थित कल्पवृक्ष, अधिष्टायक नागदेवता, प्राचीन रथ सहित अधिष्टायक घंटाकरण महावीर देव दादागुरुदेव की प्रतिमाओं के दर्शन, पूजा अर्चना कर देश में अमन, शांति खुशहाली की कामना की।

तीर्थ माला के अवसर पर समारोह के मुख्य अतिथि सीजेएम खगेंन्द्र कुमार शर्मा ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जैन संत -साध्वियों केवल सभ्यता संस्कृति का संरक्षण विकास ही नहीं करते अपितु सच्चाई, ईमानदारी, सहिष्णुता, सत्यपरता, संतुलन और दया-क्षमता भाव आदि आत्मीय गुणों को विकसित करने की भी पद्धति बताते हैं। जिनसे आंतरिक जीवन का निर्माण होता है और सामाहिक जीवन व्यवस्थित बनता है। उन्होंने कहा कि जैसलमेर के रेगिस्तानी क्षेत्र में साधु-साध्वियों का विचरण बहुत कम होने से यहां के वासिंदो में धार्मिक संस्कारों सामाजिक कार्यक्रमों के प्रति आतुरता बढी है। विशिष्ट अतिथि बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन, नाकोडा तीर्थ के अध्यक्ष एडवोकेट अमृतलाल जैन, बाड़मेर नगर परिषद के सभापति लुणकरण बोथरा, ब्रहमसर तीर्थ के अध्यक्ष दानमल डुंगरवाल जैन ट्रस्ट जैसलमेर के अध्यक्ष महेन्दसिंह भंसाली, कोलकाता के सोहन ने साध्वी मंडल सभी पदयात्रियों की सुख साता पूछते हुए कहा कि लौद्रवा की धर्मधरा में भक्ति भाव तथा आत्मियता अधिक है। धर्म ही उत्कृष्ट मंगल है। साध्वी सौम्यगुणा ने कहा कि आज इस तीर्थ माला के पावन अवसर प