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यूरिया डीएपी की कमी किसानों पर भारी

7 वर्ष पहले
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मरुभूमि के किसानों की समस्याओं का अंबार कम होता दिखाई नहीं दे रहा है। वहीं प्रशासनिक उदासीनता भी उन पर भारी पड़ रही है।

पहले नहरों में पानी की कमी, उसके बाद मौसम की मार झेल कर टूट चुके किसानों पर अब फसलों की उत्पादकता बढ़ाने फसलों के लिए जरुरी यूरिया डीएपी की कमी ने कमर ही तोड़ कर रख दी है। किसानों के सामने इन दिनों यूरिया डीएपी की कमी परेशानी बनी हुई है। समय पर इसकी पूर्ति नहीं होती है तो फसलों के उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में ये साल किसानों के लिए नुकसान ही नुकसान ला रहा है।

फाइल फोटो

इन फसलों के लिए जरुरी

यूरियाडीएपी की फसलों की उत्पादकता के लिए महत्वपूर्ण घटक है। डीएपी की जरुरत गेहूं के लिए रहती है। वहीं यूरिया सरसों, जीरा ईसब के लिए जरुरी है। जिले के नहरी बारानी क्षेत्र में इन फसलों की ही सर्वाधिक बुवाई है। फसलों की उत्पादकता के लिए किसानों को इनकी महत्ती जरुरत है।

पानी की भी कमी

यूरियाडीएपी की जरुरत फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए किया जाता है। जैसलमेर की कुल सिंचित जमीन के अनुसार 100 मैट्रिक टन डीएपी की जरुरत है। वहीं करीब चार हजार मैट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता है। जिम्मेदारों की माने तो इस बार पानी की कमी मौसम की मार के चलते करीब आधे क्षेत्र में ही बुवाई हुई है जिससे इन आवश्यक तत्वों की जरुरत भी आधी हो चुकी है। ऐसे में करीब 250 मैट्रिक टन डीएपी चाहिए वहीं करीब 2 हजार मैट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता है। लेकिन वर्तमान स्थिति को देखा जाए तो 100 मैट्रिक टन यूरिया बारानी जमीन के लिए उपलब्ध है। वहीं नहरी क्षेत्र के लिए मात्र 600 मैट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है। ऐसे में फसलों की महत्ती जरुरत की उपलब्धता भी पूरी नहीं है।

नहींमिल रहा है जीएसएस पर

इसबार ग्राम सेवा सहकारी समितियों के मार्फत से यूरिया डीएपी की बिक्री नहीं हो रही है। प्रतिवर्ष ग्राम सेवा सहकारी समितियां किसानों को बाजार से कम कीमत पर यूरिया डीएपी उपलब्ध करवाते है। वहीं यहां पर किसानों को ये सामग्री उधार भी मिलती है। लेकिन इस बार इसके लिए बजट का आबंटन नहीं हुआ है। ऐसे में ग्राम सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से इसका वितरण नहीं हो रहा है। जिससे किसान इसे सीधे बाजार से खरीद रहे है जो महंगा पड़ रहा है। बाजार में यूरिया के दाम करीब 282 रुपए तथा डीएपी के दाम करीब 1260 रुपए है। नहरी क्षेत्र