दलित चेतना के संवाहक थे आत्माराम
जैसलमेर. दलितचेतना के संवाहक के रूप में स्वतंत्रता सैनानी एवं जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष आत्माराम गर्ग जीवनपर्यंत अपने मूल्यों एवं आदर्शों के साथ जन जागरण में डटे रहे। बचपन से ही वे स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े थे। गांधी जी के राष्ट्रव्यापी से प्रेरित होकर शोषण और जुल्मों के विरुद्ध आपने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया। ग्रामीण क्षेत्रों में खास कर म्याजलार क्षेत्र में कांग्रेस का प्रचार करने और तिरंगा फहराने के जुर्म में स्व. गर्ग को ६६दिनका कारावास भी भोगना पड़ा था। १२दिसम्बरस्व. आत्माराम गर्ग की पुण्यतिथि के रूप में मनाया जाता है। गर्ग का जन्म १५अगस्त१९१६कोमाता खातू देवी की कोख से हुआ, आपके पिता का नाम कस्तूरचंद गर्ग था। १९४७मेंगर्ग हरिजन सुधार मण्डल के अध्यक्ष मनोनीत हुए तथा प्रजा मण्डल की सक्रिय सदस्यता के कारण गर्ग राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ेे। गर्ग ने राज्य स्तरीय नेताओं के मार्ग दर्शन में हरिजनों पर हो रहे जुल्म एवं अत्याचारों के बारे में संगठित विरोध को जारी रखा। स्वतंत्रता के पश्चात गर्ग अपने पैतृक गांव म्याजलार आस-पास सत्तो, बैरसियाला, खुहड़ी, करड़ा, पोछीणा, बसियां आदि में दलितों के हो रहे शोषण, अन्याय, छुआछूत, बेगारी तथा अन्य जुल्मों के खिलाफ जन जागरण में सतत्ï रूप से संलग्र रहे।
जनप्रतिनिधिभी बने : १९६०मेंजैसलमेर नगरपालिका चुनावों में गर्ग निर्विरोध पार्षद निर्वाचित हुए। जैसलमेर में १९६९मेंपड़े भयंकर अकाल के समय आपने संघर्ष समिति बनाकर स्थानीय गोपा चौक में आमरण अनशन किया जिसमें अंतत: जैसलमेरवासियों की विजय हुई। १९८१मेंस्व. गर्ग जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर मनोनीत हुए।