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मंथर गति से चल रहा 193 आरडी स्कीम का काम
सुदूर गांवों तक लोगों को पानी पहुंचाने के सरकारी दावे यहां खोखले साबित हो रहे हैं। बजट के अभाव में यहां 27 करोड़ रुपए की लागत वाली पेयजल योजना दम तोड़ती नजर रही है। इसे 193 आरडी से जोड़ा जाना है और इससे आसपास के 14 गांवों और 28 ढाणियों को पेयजल सुलभ कराना प्रस्तावित था। इसमें अब तक तो जीएलआर बने हैं और अन्य काम हो पाया है। मूल रूप से चार साल से लंबित इस योजना में सात माह के दौरान इसमें सिर्फ 9 किमी तक ही पाइप बिछ पाए हैं।
इनगांव-ढाणियों को होगा लाभ
इसयोजना के तहत सम कनोई क्षेत्र के 14 गांव 28 ढाणियों के बाशिंदों को शुद्ध मीठा पानी उपलब्ध हो सकेगा। इनमें रोजाणियों की ढाणी, मुबारक की ढाणी, भीलों की ढाणी, सम, मेघवाल की ढाणी, बींदा, नीम्बा, मेहबूब का पार, सम सेंड ड्यून्स, लखमणा की बस्ती, तुर्के की बस्ती, कनोई ,केशुओं की बस्ती, सलखा, राणसिंह की ढाणी सहित आसपास के गांवों ढाणियों की जीएलआर अब मीठा पानी से भरी जाएगी। सबसीडर लाइनों से गांवों ढाणियों को जोड़ा जाएगा। योजना के तहत नहर के पास193 आरडी पर 19 लाख लीटर की डिग्गी फिल्टर प्लांट बनना था। जिससे 19 किमी दूर रोजाणियों की ढाणी में 3 लाख लीटर की टंकी तक पानी जाएगा। यहां से पानी कनोई में बनने वाली 1.5 लाख लीटर की टंकी तक पहुंचेगा।
अभीतक पहला चरण भी पूरा नहीं हुआ
इसयोजना के तहत पहले चरण में 19 लाख लीटर की डिग्गी फिल्टर प्लांट बनना था। करीब 19 किमी दूर रोजाणियों की ढाणी तक पाइप लाइन बिछाई जानी थी। उसमें से करीब 6 किमी लाइन बिछ पाई है। वहीं कनोई के लिए करीब 8 किमी की लाइन ही सात माह में बिछ पाई है। विभागीय अधिकारियों की माने तो बजट और पाइप नहीं आने के कारण काम प्रभावित हो रहा है। पहले पाइप लाइन बिछेगी उसके बाद जाकर जीएलआर अन्य काम प्रारंभ होंगे।
बढ़जाएगा बजट
समकनोई गांवों को नहर के माध्यम से मीठा पानी उपलब्ध करवाने के लिए चार साल पहले इस योजना को तैयार किया गया था। उस समय इसकी लागत करीब 20 करोड़ आंकी गई थी। चार साल तक राशि स्वीकृति, प्लान तैयार करने सहित अन्य कार्यों से लटकते-लटकते आखिर जाकर 2014 में इस योजना को अमलीजामा पहनाया जा सका है। चार साल में इसकी लागत करीब सात करोड़ रुपए बढ़कर 27 करोड़ हो गई। अब और देरी हुई तो इसकी लागत बढ़ भी सकती है।
पानीकी कमी से जूझ रहे हैं ग्रामीण
जैसलमेरजिला वैसे भी डार्क ज