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बीएसएफ केे जांबाज़ शार्पशूटर्स जिनके बारे में कोई नहीं बताता
देशकी 6,386 किमी लंबी बॉर्डर पर दुश्मन की हर हरकत पर पैनी नजर रखते हैं बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के जवान। इसी फोर्स के 220 शार्पशूटर जैसलमेर क्षेत्र की पाकिस्तान से सटी किशनगढ़ फील्ड फायरिंग रेंज में पिछले पांच दिनों से थे। 10 हजार जवानों में से चुने गए 220 शार्पशूटरों ने 81 मोर्टार तथा एमएमजी से निशाने लगाए। पुलिस के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट्स और स्पेशल फोर्सेस पर तो फिल्में तक बनी हैं, लेकिन बीएसएफ के इन शार्पशूटर्स को कोई नहीं जानता। भास्कर ने इनके साथ एक दिन बिताया।
जम्मू फ्रंटियर की सपोर्ट वेपन टीम के मेंबर हैं आदेश सिंह। 1800 मीटर की दूरी से सीधे दुश्मन के सीने में गोली उतारना सुंदरबनी में तैनात अादेश की पहचान है। निशाना ऐसा कि एक बार में आधा ट्रिगर दबाकर 4 से 5 राउंड 6 फायर कर सामने वाले को कर देते हैं ढेर।
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3-4माह पूर्व चिकन नेक एरिया में पाकिस्तान ने फायरिंग कर दी थी। आदेश ने भी जवाब दिया। रात भर फायरिंग चली। बुलेट का अस्लाह और मंगवाया गया। 3 रेंजर्स ढेर कर दिए। सुबह रेंजर्स ने हाथ खड़े किए तभी आदेश ने फायरिंग रोकी। इसी टीम के असिस्टेंट कमांडेंट नाजिम खान बताते हैं कि चिकन नेक एरिया में ही दो दिन लगातार चली फायरिंग में आठ रेंजर्स ढेर करने के साथ तेल डिपो आर्मी टारगेट को भी तबाह कर दिया।
घुसपैठका जवाब देने में इनकी अहम भूमिका
राजस्थानफ्रंटियर के प्रवक्ता डीआईजी रवि गांधी बताते हैं कि एमएमजी और मोर्टार टीमें अपने वेपन्स के साथ जम्मू कश्मीर में सीज फायर का जवाब देने में सबसे बड़ी भूमिका निभा रही हैं। बीएसएफ की 79 बटालियन के कमाडेंट एसआर राम के अनुसार द्वितीय विश्व युद्ध में जमीनी युद्ध िजताने में अहम रोल अदा करने वाले मोर्टार काे चलाने के लिए आठ से दस सप्ताह की कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है। शूटर का सिलेक्शन भी राइफल मोर्टार से अच्छे निशाना लगाने से ही किया जाता है।
1. मीडियम मशीन गन (एमएमजी) टीम:
वैपन: 7.62 एमएम की बुलेट, 1800 मीटर रेंज, 600 से 800 राउंड प्रति मीटर राउंड, एक फायर में 200 से 250 राउंड।
टीम:नौ शूटर। तीन-तीन शूटर मिलकर एक एमएमजी ऑपरेट करते हैं। मुख्य शूटर फायर करता है एक स्टैंडबाय रहता है। तीसरा शूटर निशाने बताता है।
शूटिंग: एक फ्रंटियर की टीम को 18 मिनट तक लगातार फायरिंग करनी होती है। मार्शल प्वाइंट यानी निशाना लगाने की जगह से एक किमी पहले यह टीम दौड़कर यहां आती है। पोजिशन लेकर पूरे 18 मिनट में तीन से चार हजार राउंड फायर। इस अवधि में सामने काल्पनिक टारगेट के सीने में जितनी गोली लगती है उसी से एक्युरेसी का पता चलता है।
2. 81 एमएम माेर्टार शूटिंग टीम
वैपन: 81 एमएम का बम, 5 किमी रेंज, 100 गज के दायरे में तबाही, 3 से 5 सैकेंड में एक फायर, एक मिनट में 20 फायर।
टीम: तीन मेंबर की टीम को ओपी टॉवर पर बैठा सेक्शन कमांडर सेट पर दिशा, डिग्री हाउट बताता है। टीम तुरंत ही कम्पास पर इसका मिलान कर माेर्टार में उसे सेट करती है।
शूटिंग: जैसे ही बैरल में गोला डालते हंै तो वह पांच से दस सेकंड में निशाने पर जा गिरता है और सौ गज के एरिया को नष्ट करता है। इन तीनों चीजों के लिए लगातार दुश्मन के एरिया की मैपिंग करनी पड़ती है। जिस टीम के ज्यादा सटीक निशाने पर बम गिरते हंै, वह विजेता रहती है।
संदीप चोकेकर और नंद कुमार। फोटो- पूरण सिंह