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संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण पर चर्चा की

7 वर्ष पहले
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भारतीयजैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा वित्त पोषित अखिल भारतीय जैव विविधता संरक्षण एवं संवर्धन परियोजना के अंतर्गत काजरी प्रादेशिक अनुसंधान केन्द्र जैसलमेर पर शुक्रवार को एक दिवसीय प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। जिसमें कृषकों, विद्यार्थियों, कृषि एवं वन विभाग के अधिकारियों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसका मुख्य उद्देश्य संकटग्रस्त पादपों के संरक्षण की जागरूकता लाना था।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपवन संरक्षक बीजो जोय ने इस दिशा में काजरी द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की एवं सभी संभागियों से आह्वान किया कि वे यहां से प्राप्त जानकारी का आगे प्रचार प्रसार करें। विशिष्ट अतिथि साहित्यकार दीनदयाल ओझा ने दैनिक जीवन के उपयोग, पर्यावरण से इनका समन्वय एवं संरक्षण पर बल दिया। डॉ. के.डी. खिडिय़ा ने इन्हीं पौधों को अपने कृषि क्षेत्रों में संरक्षित करने की आवश्यकता जताई। काजरी अध्यक्ष डॉ. जे.पी. सिंह ने संकटग्रस्त पादप संरक्षण की महत्ता पर प्रकाश डाला। प्रधान अन्वेषक एवं काजरी जोधपुर के विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेश कुमार ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में मरू क्षेत्रीय वनस्पतियों की विशिष्टता एवं उपयोगिता के मध्य नजर यहां की विलुप्त हो रही पादप प्रजातियों को संरक्षित किए जाने के प्रयासों पर प्रकाश डाला।

तकनीकी सत्र में पीम्पा, खिरोली, भाकरकंदा, फोग, अंधोखिप, हेडुला आदि संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण एवं संवर्धन के विषय में विस्तार से बताया गया। डॉ. अखतसिंह ने इस विषय पर विशेष रूप से जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हंसराज महला ने किया एवं डॉ. महाराज सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

जैसलमेर. काजरी के प्रक्षेत्र दिवस कार्यक्रम काे संबोधित करते हुए और काजरी के प्रक्षेत्र दिवस में हिस्सा लेते संभागी।