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पशु शिविरों की अवधि नहीं बढ़ने से गहराने लगा रोष

6 वर्ष पहले
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जैसलमेर. भयंकरअकाल की चपेट में आए जैसलमेर जिले के पशु पालकों की समस्याएं कम नहीं होने का नाम नहीं ले रही है। सरकार द्वारा पशु पालकों को राहत पहुंचाने के लिए पशु शिविर स्वीकृत किए गए थे। लेकिन उनकी भी अवधि समाप्त हो चुकी है। यहां तक कि अवधि समाप्त हुए करीब 15 दिन से अधिक समय गुजर गया है। लेकिन शिविरों की अवधि बढ़ाने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। ऐसे में पशुपालकों की चिंताएं बढ़ गई। कई जगहों पर शिविर चल रहे है तो कहीं-कहीं बंद भी हो चुके है। दूसरी तरफ जिले से अभी भी अकाल का साया दूर नहीं हुआ है।

15दिन हुए शिविर बंद हुए

सरकारने जिले की अकाल की स्थिति को देखते हुए 90 दिन की अवधि के शिविर स्वीकृत किए थे। शिविरों की अवधि करीब 15 दिन पहले ही समाप्त हो चुकी है। लेकिन अभी तक जिले में अकाल की स्थिति को देखते हुए अवधि नहीं बढ़ाई गई है। ऐसे में पशुपालकों की दिक्कतें बढ़ गई है। जिले से अकाल का साया भी दूर नहीं हुआ है। ऐसे में पशुपाल शिविर संचालक असमंजस में है।

68करोड़ है बकाया

जिलेमें 90 दिनों तक चलाए गए पशु शिविरों का करीब 70 करोड रुपए खर्च आया है। जिसमें से 2 करोड रुपए का भुगतान किया गया है। अभी तक भी करीब 68 करोड रुपए बकाया चल रहे है। ऐसे में शिविर संचालकों के समक्ष भी दुविधा की स्थिति है। वहीं शिविर आगे बढ़ाने के आदेश भी नहीं आए है। शिविर संचालकों में भुगतान में हो रही देरी को लेकर रोष है। वहीं पशुपालकों में शिविर अवधि नहीं बढ़ने से रोष है। गत 15 दिनों से शिविर बंद है ऐसे में पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है।

^सरकारने 50 प्रतिशत शिविर ही स्वीकृत किए थे। उनका भी करीब 68 करोड़ का भुगतान बकाया है। शिविर अवधि समाप्त हुए 15 दिन हुए है। लेकिन आगामी आदेश नहीं आए है। जिससे पशुपालकों में रोष है। अब्दुलाफकीर, पूर्व जिला प्रमुख जैसलमेर