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नौकरी को ‘कालापानी’ बनाने वाली तबादलों की दो नीितयां

7 वर्ष पहले
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केस

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{शिक्षकखासकर महिला टीचर्स लंबे समय से परिवार से दूर हैं। नौकरी ही बूढ़े मां-बाप की सेवा में आड़े रही है। परिवार को नहीं संभाल पा रहे हैं।

{ सरकार आश्वासन तो देती है। लेकिन पिछले 16 साल से कोई राहत नहीं मिली है।

तर्क सरकार का

{येजिले शिक्षा की दृष्टि से पिछड़े हुए हैं। अगर तबादलों पर लगा बैन हट जाएगा तो ये शिक्षक अपने गृह जिले में चले जाएंगे और यहां शिक्षकों की कमी हो जाएगी।

तबादलों की इस दोहरी नीति पर अपनी प्रतिक्रिया 9672977751 पर दें।

तबादलों पर नीति बनाई जाए। ताकि जो शिक्षक पीड़ित हैं। उन्हें राहत मिल सके।

-विश्वनाथ, विधायक, खाजूवालाविधानसभा क्षेत्र (बीकानेर)

लगता है जैसे काला पानी की सजा भुगत रहे हैं

नागौर निवासी सुरेश मिर्धा राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल कामटिया बासंवाडा में कार्यरत है। वे 11 साल से 500 किमी दूर नौकरी कर रहे हैं। जॉइन करते समय सोचा भी नहीं था कि वे वापस घर नहीं पाएंगे। बोले-हम तो जैसे काले पानी की सजा भुगत रहे हैं। प|ी को लकवा है। उसकी देखभाल भी नहीं हो पा रही।

हम कहीं भी जाने को तैयार, पर भेदभाव क्यों?

बानसूर निवासी पूनम शर्मा बांसवाड़ा के राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक स्कूल में कार्यरत हैं। यहां 7 साल से नौकरी कर रही हैं। पूनम ने कहा- मैं तो कहीं भी पोस्टिंग के लिए तैयार हूं, लेकिन ऐसा भेदभाव क्यों हो रहा है। इसकी वजह से परिवार से कट गई हूं। घर की जिम्मेदारी पति को उठानी पड़ रही है। सामाजिक संपर्क कट गया है।

बाड़मेर 3005

बारां895

झालावाड़727

बीकानेर1267

जैसलमेर1192

जालौर1792

सिरोही605

डूंगरपुर1300

बांसवाड़ा1409

प्रतापगढ़1219

इनपदों पर भर्ती हो तो सुधर सकते हैं हालात।

विनोद मित्तल | जयपुर

तबादलोंपर लगा बैन सरकार ने भले ही हटा लिया हो, लेकिन 10 जिलों में 12 हजार शिक्षक ऐसे हैं जो इसका फायदा नहीं ले पाएंगे। वजह-तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों में अपनाई जा रही दोहरी नीति। राज्य के 23 जिलों में तबादलों के नियम अलग हैं बाकी 10 में अलग। ये दस जिले प्रतिबंधित हैं यानी एक बार नौकरी लगने के बाद शिक्षक यहां से दूसरे जिले में नहीं जा सकते। यहां नौकरी कर रहे शिक्षक राज्य में कहीं भी जाने को तैयार हैं, लेकिन पिछले 16 साल से यहां तबादलों पर रोक है। पीड़ित शिक्षकों में 5 हजार से ज्यादा तो म