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ऑक्सीजन जीवन रक्षक संसाधनों के बिना ही चल रही 108

5 वर्ष पहले
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दूरदराज के ग्रामीण अंचलों में मरीजों को उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा चलाई गई 108 योजना मरुभूमि में अपने उद्देश्यों पर खरी नहीं उतर पा रही है। पहले से ही लचर चिकित्सा व्यवस्थाओं के आगे 108 भी अपने मूल उद्देश्य से भटक गई है। गौरतलब है कि जैसलमेर में चौदह 108 स्वीकृत है। जिसमें से 12 ऑन रोड अपनी सेवाएं दे रही है। लेकिन 108 में ऑक्सीजन अन्य मूलभूत सुविधाओं के अभाव में मरीजों की जान पर बनती है। 108 की पूरी योजना में चिकित्सा महकमा केवल मॉनिटरिंग ही कर रहा है।

क्या-क्या होता है 108 में

108गाड़ी में ऑक्सीजन सिलेंडर विद मशीन, कंप्लीट प्राथमिक उपचार किट, जहर निकालने के लिए सेक्शन मशीन, ब्लड प्रेशर पल्स मशीन, बच्चों के लिए नीमो लाइजर मशीन के साथ सभी महत्वपूर्ण दवाइयां भी उपलब्ध होती है। जिनका जरुरत के हिसाब से उपयोग लिया जाता है। ऐसे में किसी एक भी उपकरण के सही नहीं होने या खराब होने की स्थिति में मरीज की जान के साथ खिलवाड़ होता है।

गुरुवार को बिना ईएमटी के ही पहुंची 108

गुरुवारको बईया गांव के श्रवणसिंह (18) को सांस में तकलीफ होने की शिकायत के कारण झिनझिनयाली पीएचसी से जवाहर अस्पताल के लिए रैफर किया गया। लेकिन 108 में ईएमटी नहीं होने की स्थिति में मरीज को बिना ईएमटी ही अस्पताल लाया गया। बदकिस्मती से गाड़ी में ऑक्सीजन सिलेंडर भी खाली होने से मरीज को पूर्णतया जोखिम भरे हालात में अस्पताल लाया गया।

ईएमटी छुट्‌टी पर, मरीजों की हालत खराब

रोक देते हैं पेमेंट

108योजना के तहत चिकित्सा विभाग केवल मॉनिटरिंग ही कर रहा है। जानकारी के अनुसार 108 का पूरा काम एक निजी कंपनी को ठेके पर दिया गया है। ठेके पर काम होने की स्थिति में 108 गाड़ी की मरम्मत से लेकर उसके अंदर चिकित्सा उपकरणों का रखरखाव भी निजी कंपनी की जिम्मेदारी है। लेकिन निजी कंपनी अपनी जिम्मेदारी पर खरा नहीं उतर पा रही है। चिकित्सा विभाग प्रतिमाह एक 108 को करीब 1 लाख रुपए की राशि जारी करता है। शिकायत होने की स्थिति में उस 108 का पेमेंट कंपनी को नहीं दिया जाता।

राज्य सरकार की 108 योजना के तहत निजी कंपनी को ठेके पर दिए जाने के बाद 108 की पूर्ण जिम्मेदारी निजी कंपनी की ही है। गाड़ी की मरम्मत से लेकर उसमें प्रयुक्त सभी उपकरणों के रखरखाव के लिए निजी कंपनी ही जिम्मेदार है। लेकिन झिनझिनयाली की 108 गाड़ी में ऑक्सीजन सिलेंडर खाली होने की स्थिति में किसी आपातकाल मरीज की जान पर बन सकती है।

चिकित्सा विभाग द्वारा प्रति 108 में एक ईएमटी एक पायलट नियुक्त किया गया है। जिन्हें तनख्वाह भी निजी कंपनी द्वारा दी जाती है। ऐसे में किसी किसी ईएमटी के छुट्‌टी पर जाने की स्थिति में 108 बिना ईएमटी के ही मरीजों को मुख्य अस्पताल तक लाने का काम करती है। ऐसे में बीच में ही किसी मरीज की स्थिति ज्यादा खराब होने पर आपातकालीन उपचार की कोई व्यवस्था नहीं होगी।

सिर्फ राशि रोकना उचित है

चिकित्साविभाग द्वारा 108 की सेवाओं के लिए निजी कंपनी को प्रतिमाह करीब 1 लाख रुपए जारी किए जाते हैं। काेई शिकायत प्राप्त होने की स्थिति में उस गाड़ी से संबंधित पेमेंट नहीं की जाती। ऐसे में सोचने का विषय यह है कि लापरवाही के कारण किसी अप्रिय घटना घटित होने की स्थिति में सिर्फ राशि ही जारी नहीं की जाएगी। इस हिसाब से बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की आस पाले लाेग 108 से क्या उम्मीद रख सकते हैं। यह सोचने का विषय है।

^गुरुवार को मेरे भानजे को झिनझिनयाली से जैसलमेर रैफर किया गया। 108 में ईएमटी के साथ अन्य कई सुविधाएं नहीं थी। जिससे कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। बिना ईएमटी अन्य संसाधनों के 108 चल रही है। जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा घटित हो सकता है। लापरवाही के कारण किसी की जान पर बन सकती है। सवाईसिंह,मरीज के परिजन

^108योजना के तहत पूरा काम ठेके पर दिया गया है। निजी कंपनी को ही प्रतिमाह इसका भुगतान किया जाता है। किसी गाड़ी की शिकायत होने की स्थिति में उस गाड़ी से संबंधित पेमेंट रोक दिया जाता है। चिकित्सा विभाग केवल 108 की मॉनिटरिंग ही करता है। शेष सभी काम निजी कंपनी द्वारा किए जाते हैं। डॉ.एन आर नायक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी

जैसलमेर. संशाधनों के अभाव से जूझ रही है 108।

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