फकीर को बनाया जा सकता है जिलाध्यक्ष
जिला कांग्रेस में फेरबदल के संकेत, मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि को जिम्मेदारी मिलने के कयास
राजनीति
भाजपाके बाद अब कांग्रेस में उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं। वर्तमान में कांग्रेस जिलाध्यक्ष रावताराम है और उसे फकीर परिवार की कठपुतली ही माना जाता है लेकिन अब फकीर परिवार खुद जिलाध्यक्ष का पद ले सकता है, क्योंकि इस बार उनके पास कोई और बड़ा पद नहीं है। पिछले दो कार्यकाल में रावताराम को जिलाध्यक्ष इसलिए बनाया गया क्योंकि फकीर परिवार के पास विधायक जिला प्रमुख का पद था। इस बार फकीर परिवार जिलाध्यक्ष की कमान अपने हाथ में ले सकता है।
गुटबाजी के चलते जिलाध्यक्ष नहीं बदला
प्रदेशाध्यक्षसचिन पायलट ने अपनी नई टीम का हाल ही में ऐलान किया है। जिसमें 20 जिलों के जिलाध्यक्ष भी बदले गए हैं। लेकिन जैसलमेर जिलाध्यक्ष को अभी तक नहीं बदला गया है। राजनीतिक जानकार इसकी वजह फकीर परिवार धणदै परिवार के बीच गुटबाजी को मान रहे हैं। दोनों ही अपनी पसंद का जिलाध्यक्ष चाहते हैं। पिछले कई सालों से फकीर परिवार की पसंद का जिलाध्यक्ष बन रहा है। एक बार फिर गेंद फकीर परिवार के पाले में है।
इसबार जिलाध्यक्ष नहीं होगा किसी के हाथ की कठपुतली
पिछलेदो कार्यकाल से रावताराम ही जिलाध्यक्ष बन रहे हैं और वे केवल कठपुतली के रूप में ही कार्य कर रहे थे। लेकिन यदि इस बार फकीर परिवार को जिलाध्यक्ष की कमान मिलती है और पूर्व जिलाप्रमुख जिलाध्यक्ष बनते हैं तो वे किसी के हाथ की कठपुतली नहीं होंगे। जिससे कांग्रेस में कठपुतली जिलाध्यक्ष की छाप भी धुल जाएगी।
जातिगत समीकरण भी बने
कांग्रेसने राजपूत वर्ग को प्रतिनिधित्व देते हुए सुनीता भाटी को महासचिव बना दिया है। वहीं पहले सही एससी के रूपाराम धणदै प्रदेश सचिव है। इसके अलावा ओबीसी की ओर से उम्मेदसिंह तंवर भी प्रदेश सचिव है। ऐसे में अब कांग्रेस का सबसे बड़ा वोट बैंक मुस्लिम समुदाय ही शेष है, जिसके चलते कयास लगाए जा रहे हैं कि मुस्लिम वर्ग को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
अब्दुलाफकीर हो सकते हैं जिलाध्यक्ष
जातिगतसमीकरण बनने के बाद अब कांग्रेस के मुस्लिम वोट बैंक के लिए जिलाध्यक्ष का पद रह गया है। संभावना जताई जा रही है कि इस बार फकीर परिवार खुद अपने हाथ में कमान लेना चाहेगा और पूर्व जिलाप्रमुख अब्दुला फकीर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष बन सकते हैं।