30 हजार को पानी ही पानी, पीछे 70 हजार प्यासे
जिलेका नहरी तंत्र पूरी तरह से गड़बड़ाया हुआ है। कहने को तो नहर आने से जैसलमेर की फिजां ही बदल गई है लेकिन कुछ किसानों की ही किस्मत नहर से चमकी है, अधिकांश किसान आज भी पानी से वंचित रह जाते हैं। नहरों के आगे बैठे, प्रभावशाली रसूखदान किसान अपने हक से ज्यादा पानी ले लेते हैं वहीं टेल पर बैठे गरीब किसान पानी का इंतजार करते ही रह जाते हैं। यह मामला ठीक वैसा ही है जैसा हनुमानगढ़ गंगानगर वाले जैसलमेर के साथ सौतेला व्यवहार करते हैं। एक तो पहले से ही जैसलमेर को पूरा हक पानी नहीं मिलता है ऊपर से कुछ किसान हक से ज्यादा पानी लेकर पीछे वालों को सिंचाई से वंचित रख देते हैं।
नहरोंके पास के मुरबे को ही मिलता पूरा पानी
नहरीतंत्र का सिस्टम यही है कि नहर के पास बैठे किसानों को पूरा पानी मिलता है और टेल पर बैठे किसानों को कम पानी ही मिल पाता है। लेकिन यहां पर पूरा पानी लेने वाले किसान हक से ज्यादा पानी ले लेते हैं जिससे टेल वाले किसानों को सिंचाई पानी मिल नहीं पाता है। जानकारी के अनुसार जैसलमेर में करीब 1 लाख मुरबे हैं। जिसमें 30 हजार मुरबे हैं ऐसे जो नहरों में आगे आगे या पास में स्थित है, शेष 70 हजार मुरबे नहरों से थोड़े दूर टेल की श्रेणी में आते हैं। जानकारों के अनुसार केवल 30 हजार मुरबों को पानी मिलता है, शेष 70 हजार मुरबे बिंजाई करके बर्बाद ही होते हैं।
भास्कर ने जब इस मामले की पड़ताल की तो कई चौंकाने वाली स्थितियां सामने आई। हक से ज्यादा पानी लेने के लिए कुछ किसान कई हथकंडे अपनाते हैं। मोहनगढ़ क्षेत्र की पाली वितरिका के चक नं. 34 की 60 आरडी से 70 आरडी के बीच 3- 4 फीट ऊंची अवैध दीवार बनी हुई है। कुछ किसान इसका लम्बे समय से विरोध कर रहे हैं लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते नहरी अधिकारी इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इस दीवार की वजह से पानी आगे नहीं जा पाता है और पहले वाले किसान पूरा पानी ले लेते हैं और शेष किसान पानी का इंतजार ही करते रहते हैं।
किसानों के अनुसार इसी नहर पर कई चकों पर माेगों की साइज बड़ी है और उन पर मशीन भी नहीं लगाई गई है। किसानों के अनुसार चक सं. 25 से 30 34 के मोगे निर्धारित साइज से बड़े हैं, जिन्हें ठीक नहीं किया जा रहा है। जिससे यहां के किसान 35 क्यूसेक ज्यादा पानी ले रहे हैं। किसानों ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री को भी ज्ञापन भेजा है।
मॉनिटरिंग नहीं होने से प्रभावशाली किसानों की बल्ले बल्ले
जिलेके रामगढ़, मोहनगढ़ नाचना नहरी क्षेत्र में पूरा तंत्र गड़बड़ाया हुआ है और किसी के लिए नजर वरदान बनी हुई है तो अधिकांश के लिए नहर बर्बादी का कारण बन रही है क्योंकि उन्हें सिंचाई का पानी नहीं मिलता है। नहरी विभाग की मॉनिटरिंग नहीं होने से कई समस्याएं यथावत है और उनका निस्तारण नहीं हो रहा है। पानी की चोरी भी रुक नहीं रही है।
ऐसे लिया जाता है हक से ज्यादा पानी
>नहर के आसपास जिनके मुरबे हैं वे माइनर, नहर, वितरिका खाले में अवरोध लगाकर पानी को रोक देते हैं जिससे पानी आगे नहीं जा पाता है।
> नहर पर बने मोगों की साइज प्रभावशाली किसान अपनी मनमर्जी से बड़ी कर देते हैं जिससे उन्हें ज्यादा पानी मिलता है और टेल वाले किसान वंचित रह जाते हैं।
> एपीएम मशीनों को तोड़ दिया जाता है जिससे नहरों में क्षमता से अधिक पानी चलता है और अन्य माइनर में पानी कम चलता है।
> नहर में रात के समय सीधे ही साइफन लगाकर जनरेटर से पानी खींच लिया जाता है और रसूखदान किसानों के मुरबों में फसलें लहलहाती नजर आती है।
^यदि किसी नहर में दीवार बनी हुई है तो यह गंभीर मामला है, जल्द ही इसकी जांच करवाई जाएगी। रही बात अागे के किसानों द्वारा अधिक पानी लेने की तो इसके लिए नहर विभाग की टीमें रेगुलर मॉनिटरिंग करती है, उपलब्ध स्टाफ से हम मॉनिटरिंग करवा रहे हैं। कुछ जगहों पर अधिक पानी लेने की समस्याओं का निस्तारण भी किया है और आगामी दिनों में सभी जगह जांच करवाई जाएगी। देशराजमीणा, अति. मुख्यअभियंता, इंगांनप
जैसलमेर. पाली वितरिका के चक सं. 34 की 60 से 70 आरडी के बीच नहर के बीचों बीच बनी अवैध दीवार।