- Hindi News
- दूसरों के सुख से दुखी होना तनाव का मुख्य कारण
दूसरों के सुख से दुखी होना तनाव का मुख्य कारण
स्थानीयएस.बी.के. राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में युवा कौशल विकास प्रकोष्ठ के युवा विकास केन्द्र द्वारा आयोजित युवा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें सेवा निवृत प्रो. बालकिशन जगाणी ने छात्र/छात्राओं को तनाव प्रबंधन के बारे में बताया कि पुराने समय में अपेक्षाएं कम होने के कारण तनाव रहित वातावरण बना रहा, लेकिन आधुनिक दौर में दिनचर्या सुव्यवस्थित नहीं होने के कारण तनाव की स्थिति बनती है। प्रोफेसर जगाणी के अनुसार अपेक्षा के अनुसार योग्यता प्राप्त होना, संतोषी स्वभाव होना दूसरों के सुख से दुखी होना तनाव के मुख्य कारण है। तनाव मुक्ति के लिए ध्यान योग-साधना, दूसरों के सुख में सुखी तथा दूसरों के दुख में दुखी होना, प्रकृति के निकटता - सौंदर्यबोध,मनोरंजन तथा भूतकाल के कार्यों को हमेशा पूर्ण रखना आदि उपाय अपने जीवन में अपनाने चाहिए।
कार्यक्रम के अध्यक्ष महाविद्यालय प्राचार्य डॉ जे.के.पुरोहित ने बताया कि चिंता होने पर चिंतन करना तथा सकारात्मक सोच में अपना मन लगाना चाहिए। चिंता तनाव का प्रथम लक्षण है जो तनाव के बाद उदासी-अवसाद-मानसिक विकृति से होते हुए आत्महत्या जैसी प्रवृति की ओर ले जाती है अतः तनाव मुक्त रहने के लिए अपना मन खेल, संगीत तथा साहित्य में लगाना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन युवा कौशल विकास प्रकोष्ठ के युवा विकास केन्द्र के प्रवीण कुमार चंदेल ने किया तथा कार्यक्रम में छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष पुष्पेन्द्र सिंह ने युवाओं को इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम में अपनी भागीदारी देने के लिए प्रेरित किया। आगामी 25 सितंबर को महिला सशक्तिकरण पर केशर सिंह द्वारा व्याख्यान दिया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में संजीव कुमार वर्मा ने महाविद्यालय के सभी व्याख्याताओं तथा छात्र-छात्राओं का आभार प्रकट किया। कार्यक्रम में के.आर.गर्ग, डॉ अशोक तंवर, डॉ. शशि गुप्ता, एमआर सोऊ, एन.सी.गर्ग, संजय अखावत, डॉ दिनेश सुखवाल, डॉ आर.सी. मीना, राजेन्द्र प्रसाद, विकास केवलिया, नरसिंह, बाबूलाल, सुखसिंह उपस्थित रहे।
जैसलमेर. युवाप्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत उपस्थित कॉलेज विद्यार्थी।