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काव्य संगोष्ठी में कवियों ने बिखेरे अपने अंदाज

7 वर्ष पहले
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जिलेमें सुर संगीत काव्यकला को संरक्षण देने वाले स्वर संगम संस्थान की ओर से सोयधरीदेवी लीलाधर राठी वृद्धाश्रम में सुर काव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का आगाज गणपत जोशी के हिन्दी भाषा पर विचार एवं दोहों से किया गया। साहित्यकार मणिक्कम ने अंग्रेजी भाषा की कविता वाचन कर उसमें हिन्दी भाषा को अग्रणी भाषा रूप देने के भाव प्रकट किए। संस्थान के सचिव भोजराज वैष्णव ने घर में हो हिन्दी, देश में हिन्दी, आज दिवस है हिन्दी का… सुनाया। हास्य कवि गिरधर भाटिया ने नेताजी का जनरल नॉलेज फूली बंजर में फुलवारी, वाह री जनता व्यंग्य रचनाएं सुनाई। लक्ष्मीनारायण भाटी ने जूडी लोकगीत नदी रे किनारे लोकगीत की प्रस्तुति दी। मोहन खान ने केसरिया बालम के स्वर बिखेरते हुए वाह वाही लूटी। मनोहर महेचा ने अकाल राहत पर व्यंग्य वाचन किया। डाइट जैसलमेर के हिन्दी विभाग प्रभारी हरिवल्लभ बोहरा ने हिन्दी का महत्व प्रतिपादित किया हिन्दी के बारे में कविता सूर्य होना था जिसे, वो दीयों तक गई, मुखपृष्ठ की अधिकारिणी अब हासियों पर गई सुनाई।