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शिकायतें 1038, अब तक निलंबित सिर्फ 51

5 वर्ष पहले
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प्रदेशमें पंचायतीराज चुनाव 2015 में फर्जी दस्तावेजों से चुनाव जीतने वाले जनप्रतिनिधियों के खिलाफ शिकायतों की जांच एक साल बाद पूरी नहीं हो पाई है। पंचायतीराज विभाग को 33 जिलों के 1038 जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध फर्जी टीसी, दो से अधिक संतान, कम आयु समेत अन्य शिकायतें प्राप्त हुई। पुलिस थानों में दर्ज मामलों में आरोपी जनप्रतिनिधियों की गिरफ्तारी कोर्ट में चालान पेश करने के आधार पर जांच रिपोर्ट भेजी गई। विभाग ने अब तक राज्य के 51 सरपंचों को निलंबित किया है। जयपुर से सर्वाधिक 90 शिकायतें सामने आई। जांच रिपोर्ट कलेक्टरों के माध्यम से संभागीय आयुक्त को भेजी गई।

यूंसमझिए जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज शिकायतों की कार्रवाई : पंचायतीराजविभाग को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चुनाव लड़ने वाले 1038 जनप्रतिनिधियों की शिकायतें प्राप्त हुई। इसमें जयपुर के 90 जनप्रतिनिधि, अजमेर 45, अलवर 88, बाड़मेर 37, भरतपुर 55, करौली 50, नागौर 51 जनप्रतिनिधियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज है। इसके अलावा अन्य जिलों में 20 से 40 के बीच शिकायतें दर्ज है। विभाग ने अब तक बूंदी 3,चुरू,झालावाड़,नागौर,अलवर, बीकानेर में 4-4, दौसा 5, झूंझनू 3, डूंगरपुर, जैसलमेर, सवाई माधोपुर में 2-2 और बाड़मेर, बारां, जयपुर, सीकर, सिरोही, टोंक में एक-एक जनप्रतिनिधि को निलंबित किया है।

90फीसदी मामले फर्जी टीसी से जुड़े : जनप्रतिनिधियोंके खिलाफ दर्ज शिकायतों में सर्वाधिक 90 फीसदी मामले फर्जी टीसी से संबंधित है। इसमें भी अधिकांश सरपंच शामिल है। पुलिस थानों में दर्ज प्रकरणों की जांच कर पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश किए। इस दौरान जनप्रतिनिधियों की गिरफ्तारी हुई। लेकिन जिला परिषद शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट तैयार कर संभागीय आयुक्त को भेजी गई। जहां से अब तक प्रक्रिया पूरी नहीं होने से मामला आगे नहीं बढ़ रहा है।

बाड़मेर.12 माह में 144 के बदले सिर्फ 56 जांच रिपोर्ट तैयार, 28 दोषी जनप्रतिनिधियों की फाइलें रोकी : बाड़मेरजिले में पंचायतीराज चुनाव में फर्जी टीसी से जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जांच प्रकरण में चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है। शेष| पेज 4



जिलेके 144 जनप्रतिनिधियों की जांच रिपोर्ट जिला परिषद शिक्षा विभाग को सौंपी गई। एक साल बाद महज 56 प्रकरणों की जांच पूरी हो पाई है। संभागीय आयुक्त को सिर्फ 28 जनप्रतिनिधियों की रिपोर्ट भेजी गई है। हैरत की बात यह है कि 28 जांच प्रकरणों में जनप्रतिनिधि दोषी साबित होने के बावजूद फाइलें अफसरों के पास घूम रही है। इन मामलों की जांच प्रक्रियाधीन होने का हवाला दिया जा रहा है। इतना ही नहीं 88 मामलों की जांच की प्रक्रिया ही ठंडे बस्ते में है। दो से अधिक संतान कम आयु के 33 प्रकरणों की जांच जिला परिषद को सौंपी गई। इसमें सिर्फ 11 की जांच पूरी हो पाई है। वहीं शिक्षा विभाग के पास फर्जी टीसी के 113 प्रकरणों के मुकाबले 50 की जांच रिपोर्ट एसीईओ जिला परिषद के माध्यम से कलेक्टर को भेजी जा चुकी है।

दोषी जनप्रतिनिधियों के खिलाफ होगी कार्रवाई

^पंचायतीराजचुनाव में फर्जी दस्तावेजों से चुनाव जीते जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जांच चल रही है। विभाग को जांच प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए है। आगामी दो-तीन माह में जांच पूरी होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। -सुरेन्द्रगोयल, पंचायतीराज मंत्री

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