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‘शिफ्टिंग सेंड ड्यूंस की समस्या गंभीर विशेषज्ञों से चर्चा कर समाधान करेंगे’
गृहमंत्रालय की संसदीय स्थाई समिति के अध्यक्ष पी. भट्टाचार्य ने कहा कि शिफ्टिंग सेंड ड्यूंस की समस्या बहुत बड़ी है। इसके वैज्ञानिक कारण ढूंढ़े जाएंगे और विशेषज्ञों को बुलाकर यहां का दौरा करवाया जाएगा। विशेषज्ञों से इस समस्या का स्थाई निस्तारण करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि सीमा क्षेत्र में बीएसएफ के अधिकारियों ने शिफ्टिंग ड्यूंस की समस्या के बारे में बताया है, इस पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। दो दिवसीय जैसलमेर दौरे पर आए संसदीय स्थाई समिति के सदस्यों ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत की। समिति के अध्यक्ष भट्टाचार्य ने कहा कि पिछले दिनों पूर्वी सीमाओं का दौरा किया था, वहां अलग तरह की समस्याएं है। वहां पर सामाजिक कार्यक्रमों में लोग उस पार से इस पार जाते हैं और वापस नहीं जाते हैं। इसे बंद करने के लिए बीएसएफ ने सराहनीय प्रयास किए हैं।
उन्होंने बताया कि हमने दो दिन पश्चिमी राजस्थान की सीमा क्षेत्र का दौरा किया। यहां दुर्गम इलाकों में हमारे बीएसएफ के जवान मजबूती से तैनात है। इन जवानों का मनोबल बहुत ऊंचा है और ये दुश्मन का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार है। उन्होंने कहा कि बीएसएफ ने देश की सुरक्षा के लिए जो कदम उठाए वे सराहनीय है।
समस्याओं से सरकार को अवगत करवाएंगे
समितिअध्यक्ष ने बताया कि बॉर्डर सुरक्षा के लिए जो कुछ भी होगा हम करने का प्रयास करेंगे। यहां पर फेंसिंग, फ्लड लाइट के बारे में जानकारी ली, जवानों की अन्य समस्याओं को भी जाना है और इन समस्याओं से सरकार को अवगत करवाया जाएगा। बीएसएफ की पेंशन संबंधी समस्या भी संसद में कमेटी की बैठक में रखी जाएगी।
17चौकियों को पुन: खोलने 19 नई खोलने का प्रस्ताव भेजा है
पत्रकारवार्ता में सीमावर्ती क्षेत्र में विजिलेंस की बंद हुई चौकियों में बारे में सवाल पूछे जाने पर वहां मौजूद महानिरीक्षक बी.आर. मेघवाल ने बताया कि पूर्व में सीमावर्ती इलाकों से 24 चौकियां बंद हो गई थी। गत 6 जनवरी को हमने 17 चौकियों को वापस शुरू करने 19 नई चौकियां खोलने का पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि सीमा से जुड़े गांवों ढाणियों में सेवानिवृत्त जवानों को बसाया जाए जो सुरक्षा की दीवार साबित होंगे।
जैसलमेर. सीमा क्षेत्र के समस्याओं की जानकारी लेते गृह मंत्रालय संसदीय स्थाई समिति के सदस्य।