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बैंक से सीपीयू गायब, करोड़ों के घोटाले की जांच हो सकती है प्रभावित

5 वर्ष पहले
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दो माह पहले गायब हुआ था सीपीयू

जानकारीके अनुसार इस मामले से जुड़ा एक सीपीयू जिसमें बाउचर आदि फीड किए जा रहे थे वह करीब दो माह पहले गायब हो चुका है। इस दौरान बैंक के अधिकारी स्टाफ से सीपीयू गायब करने वाले का पता ही लगाते रहे और अंदर ही अंदर सीपीयू मिल जाने के प्रयास में रहे लेकिन कोई कर्मचारी सीपीयू गायब करने की हामी नहीं भर रहा था। इस पर दो दिन पूर्व इस संबंध में पुलिस थाने में मामला दर्ज करवा दिया गया है।

गायबकरने वाला बैंक कर्मचारी ही है

बैंकके अधिकारी यह स्वीकार करते हैं कि सीपीयू गायब करने वाला कोई बैंक का ही कर्मचारी है। अधिकारी के अनुसार सीपीयू चोरी नहीं हुआ है, चोरी होता तो कोई ताले भी टूटते, यह तो स्पष्ट है कि किसी ने गायब किया है। दो माह तक बैंक प्रबंधन इसी प्रयास में रहा कि गायब करने वाला कर्मचारी सीपीयू वापस ले आए लेकिन किसी भी कर्मचारी ने गलती स्वीकार नहीं की और आखिरकार मामला दर्ज करवाना पड़ा।

कई अधिकारी कर्मचारी संदेह के घेरे में

इसवित्तीय अनियमितता के मामले में कई अधिकारी कर्मचारी संदेह के घेरे में है। मुख्य अधिकारी फिलहाल निलंबित है। आशंका जताई जा रही है कि मामले में कई अधिकारी कर्मचारी होने के चलते ही जांच में देरी हो रही है।

^करीब दो माह पहले सीपीयू गायब हुआ था, इस दौरान सभी कर्मचारियों से समझाइश की गई लेकिन बात नहीं बनी, अब इस संबंध में पुलिस में मामला दर्ज करवा दिया है। इस सीपीयू में रामगढ़ से जुड़े कुछ दस्तावेज फीड थे, हालांकि उसका असर कुछ नहीं होगा क्योंकि हमारे पास रिकार्ड सुरक्षित है। सीपीयू चोरी नहीं हुआ है, किसी ने इसी नीयत से गायब करवाया है। अर्जुनसिंहराठौड़, एमडी, कोऑपरेटिव बैंक

भास्कर संवाददाता | जैसलमेर

कोऑपरेटिवबैंक की रामगढ़ शाखा में करोड़ों की वित्तीय अनियमितता का मामला एक बार फिर उजागर हो रहा है। करीब 4 साल पुराने इस मामले से जुड़ा एक कम्पयूटर सीपीयू गत दो माह से गायब है। जिम्मेदारों की लापरवाही ही है कि दो माह पहले गायब हुए सीपीयू का मामला हाल ही में दर्ज करवाया है। शुरूआती तौर पर इस मामले में कोई बोलने को ही तैयार नहीं था। जब भास्कर ने इसकी पड़ताल की तो सामने आया कि दो दिन पहले ही बैंक की ओर से सीपीयू गायब होने का मामला दर्ज करवाया गया है।

क्याहै मामला

जानकारीके अनुसार करीब चार साल पहले रामगढ़ शाखा में करोड़ों की वित्तीय अनियमितता उजागर हुई थी। इस मामले को पहले दबाने की कोशिश की गई लेकिन मामला ज्यादा उलझन भरा होने के चलते आखिरकार उजागर हो ही गया। बावजूद इसके जांच मंथर गति से चलती रही। इस मामले की जांच पहले स्थानीय स्तर पर की गई और अब करीब एक डेढ़ साल से जोधपुर के अतिरिक्त रजिस्ट्रार मामले की जांच कर रहे हैं। इतना लम्बा समय बीत जाने के बाद भी जांच पूरी नहीं हुई है।

गायबकरने के पीछे क्या उद्देश्य

बैंकके अधिकारी सीपीयू गायब होने की घटना को वित्तीय अनियमितता से नहीं जोड़ रहे हैं। जबकि गायब करने वाले का उद्देश्य नीयत यही थी, इस बात को स्वीकार कर रहे हैं। जिसने भी सीपीयू गायब किया है उसका मकसद यही था कि कम्पयूटर के रिकार्ड जांच करने वालों तक नहीं पहुंच पाएं।

सीपीयूमें ऐसा कुछ नहीं

बैंकके अधिकारी इस सीपीयू के गायब होने को रामगढ़ शाखा की वित्तीय अनियमितता से नहीं जोड़ रहे हैं। उनका कहना है कि जो बाउचर, एंटी आदि कम्पयूटर में फीड थे उनकी सॉफ्ट कॉपी रिकार्ड हमारे पास सुरक्षित है।

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