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ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

7 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | रायपुर मारवाड़

क्षेत्रके ग्रामीणों ने सीएम एवं राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण सहित सभी संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर लाम्बिया से रायपुर मेगा हाईवे के मार्ग में अतिरिक्त गांवों को जोड़कर सरकारी धन का अनावश्यक व्यय रोकने, संकेत मानचित्र के अनुसार ही निर्माण कार्य करने जैतारण बाईपास के प्रस्तावित मार्ग को बदलने की मांग की है। उन्होंने ऐसा करने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा नागौर जिले को राजसमंद-उदयपुर जिलों से जोड़ने के लिए मेगा हाईवे 458 का निर्माण कराया जा रहा है। पाली जिले में इसे लांबिया से रायपुर होकर निकाला जाना प्रस्तावित है। वर्तमान में इस मार्ग पर भूमि अवाप्ति एवं निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। भूमि अवाप्ति एवं निर्माण कार्य की कुछ बातों को लेकर ग्रामीणों में असंतोष है। क्षेत्र के ओमप्रकाश पंचारिया, घनश्यामसिंह राजपुरोहित, शंकरलाल, सोहनलाल सिंगारिया, दिनेश कुमार आदि प्रबुद्ध नागरिकों ने बताया कि मेगा हाईवे 458 का जो संकेत मानचित्र दर्शाया गया था। उसमें लांबिया से रायपुर हेतु लांबिया, जैतारण, निमाज एवं रायपुर का मार्ग दर्शाया गया था। जबकि अब जो निर्माण कार्य करवाया जा रहा है, उसे लाम्बिया, आगेवा, चावडिय़ा, निंबेडा, कुशालपुरा, लिलांबा होते हुए रायपुर करवाया जा रहा है। ऐसा करने से केवल 25 किमी. दूरी बढ़ जाएगी बल्कि इन गांवों के किसानों काे भी अपनी जमीन गंवानी पड़ेगी।

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लगताहै कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अपने मूल उद्देश्य से ही भटक गया है। वैसे तो निमाज के बाद बर-ब्यावर होते हुए भी जस्सा खेड़ा-भीम तक जाया जा सकता है, किंतु दूरी एवं समय की बचत के लिए ही इसे निमाज के बाद रायपुर होकर निकाला जाना था। अब लाम्बिया से रायपुर के मार्ग में अतिरिक्त गांव जोड़ देने के कारण अनावश्यक रूप से सरकारी राजस्व का अपव्यय तो होगा ही क्षेत्र के ग्रामीणों को भी इस मार्ग से गुजरने पर टोल टैक्स देना होगा। इससे तो अच्छा होता यदि निमाज के बाद एन.एच. 112 से बर होते हुए इसे रायपुर से मिला दिया जाता तो सरकार के करोड़ों रुपए की बचत भी हो जाती और दूरी घटने के कारण समय भी कम लगता। लाम्बिया से रायपुर के मार्ग में जो अतिरिक्त गांव जोड़े गए हैं, वे किसी भी दृष्टि से महत्वपूर्ण गांव नहीं हैं और घाटे का सौदा होने के कारण रोड