पाली। जोधपुर में 1 फरवरी काे कुड़ी के पास सड़क हादसे में काल-कवलित हुए 11 परिवारों पर आई विपदा की घड़ी में बलूंदा ही नहीं बल्कि आसपास के गांवों की तरफ से की जा रही मदद सेवा की अनूठी मिसाल बन रही है। मृतक परिवारों के आंसू पोंछने तथा घायलों की सेवा-सुश्रुषा के लिए समूचा बलूंदा गांव घटना के बाद से ही पैरों पर खड़ा है।
गांव की महिलाएं पीड़ित परिवार की महिलाओं काे संभाल रही हैं। इनके घरों में रसोई की जिम्मेदारी भी अपने हाथों में ले रखी है। गांव के एक फौजी की पहल के बाद अब तक घायलों के उपचार पीड़ित परिवारों की मदद के लिए 10 लाख रुपए से ज्यादा जुटाए जा चुके हैं।
जैसलमेर में मजदूरी करने वाले यह सभी सदस्य गत 1 फरवरी को अपने गांव बलुंदा में मतदान करने के लिए रहे थे। इस दौरान जोधपुर जिले के कुड़ी के समीप हुए हादसे में 12 जनों की मौके पर ही मौत हो गई थी।
इनमें 11 बलूंदा गांव के थे। साथ ही 15 जने गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मृतकों के भरोसे ही उनके परिवारों में सुबह-शाम का चूल्हा जलता था। ऐसी स्थिति में समूचा गांव एकजुट होकर इन परिवारों को संभालने में हर संभव सहयोग कर मदद की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है।
पीपाड़ के व्यापारी भी आए मदद को : पीपाड़ के सब्जी मंडी व्यापार संघ द्वारा प्रत्येक परिवार को 5-5 हजार रुपए की सहायता राशि दी गई। इसी गांव में राशन की दुकान चलाने वाले मेवाराम गुर्जर ने भी अपनी तरफ से सभी को 5-5 हजार नकद तथा एक-एक गेहूं की बोरी दी है।
राजसीको के पूर्व अध्यक्ष का भी सहयोग : घटना में घायलों का खर्चा उठाने के लिए राजसीको के पूर्व अध्यक्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुनील परिहार आगे आए। उन्होंने साथियों की मदद से शवों को उनके गांव पहुंचाने के लिए वाहनों तथा एंबुलेंस की व्यवस्था की। वे अब भी घायलों के उपचार के लिए मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध करवा रहे हैं।
घर-घर से जुटाए 4 लाख
पीड़ित परिवारों की सहायता करने में गांव वालों में भी जज्बा देखा जा रहा है। ग्रामीणों ने रविवार तक कुल 4 लाख रुपए की सहयोग राशि एकत्रित की है।
8दिन बाद पहुंची सरकार की मदद
जैतारण तहसीलदार रविवार को बलुंदा पहुंचे तथा उन्होंने मृतक परिवारों को सीएम सहायता काेष से 50-50 हजार रुपए की सहायता राशि के चेक प्रदान किए। साथ ही घायल परिवारों को भी सहायता राशि प्रदान की गई।
जुड़ता गया मदद का कारवां
फौजी के मृतक परिवारों को आर्थिक सहायता देने के बाद ग्रामीण भी लगातार आगे आते गए। जैतारण के समाजसेवी रामप्रकाश गहलोत भी इन परिवारों की हालत देखकर अपने आंसू नहीं रोक पाए थे। उन्होंने प्रत्येक परिवार को अपनी तरफ से 31 से 21 हजार रुपए तक की सहायता राशि प्रदान की।
घटना के वक्त इसी गांव का सैनिक श्रवण कुमार जाट बलुंदा आया हुआ था। गांव में एक साथ 11 लोगों की मौत की खबर सुनकर वह अवाक रह गया। इन परिवारों की स्थिति देखी तो उनसे रहा नहीं गया।
वे सीधे ही अपने घर पहुंचे तथा सेना से मिलने वाली तनख्वाह में से बचत के रूप में जमा किए हुए रुपए से भरा बैग लेकर इन परिवारों के पास पहुंचे तथा प्रत्येक परिवार को अपनी तरफ से 5-5 हजार रुपए भेंट कर दिए। फौजी ने अपने कुल 40 दिन का वेतन इन परिवारों को सौंपा।