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‘पितरों की खुशी के लिए करें श्राद्ध तर्पण’
जालोर. श्रीवेदमाता गायत्री ट्रस्ट शांतिकुंज हरिद्वार की स्थानीय शाखा में चल रहे श्राद्ध तर्पण पिंडदान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यवस्थापक हरिराम सुथार ने कहा कि मनुष्य के मरने के बाद स्थूल शरीर समाप्त होकर केवल सूक्ष्म शरीर ही रह जाता है और उसे भूख-प्यास, सर्दी-गर्मी आदि की आवश्यकता नहीं रहती। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म शरीर में विचारणा, चेतना और भावना की प्रधानता रहती है। समनसिंह ने बताया कि मरणोत्तर संस्कार में 12 पिंडदान किए जाते हैं जिनमें छह पिंडदान देवताओं, ऋषियों, दिव्य मानवों, दिव्य पितरों, यम तथा मनुष्य पितरों के निमित्त तथा सातवां पिंड मृतात्मा के निमित्त किया जाता है। अन्य पांच पिंड उन मृतात्माओं के लिए किया जाता है जो पुत्रादिरहित है, अग्निदग्ध है, उच्छिन्नकुल, वंश तथा वर्तमान या किसी जन्म के बंधु है। इस अवसर पर भैरूसिंह राजपुरोहित, प्रेमकृष्ण व्यास सहित कई सदस्य उपस्थित थे।
, महेंद्र आनंद वैष्णव, गिरधारीलाल लखारा, मंजू सेन, रंजना शारदा सहित कई सदस्य उपस्थित थे।