सलाहकार समिति की बैठक आयोजित
कृषिविज्ञान केंद्र केशवना की वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक मंगलवार को प्रसार शिक्षा राजस्थान कृषि विश्व विद्यालय जोधपुर के निदेशक डॉ. ईश्वरसिंह की अध्यक्षता जालोर खंड निदेशक वीआर सोलंकी तथा उपनिदेशक डॉ. केएन सिंह के मुख्य आतिथ्य में हुई। इस दौरान निदेशक प्रसार शिक्षा ने कहा कि जिले में अरण्डी की जीसी एच-7 किस्म उपयोगी होने के साथ साथ कीट-बीमारियों से मुक्त है। जिसका प्रदर्शन किसानों के खेत पर लगाना चाहिए। कृषि विज्ञान केंद्र कृषि अनुसंधान केंद्र आपस में समन्वय बनाकर जिले के कृषि क्षेत्रों में किसानों को तकनीकी ज्ञान दे रहे हैं, जिसे और गति दी जाएगी। उपनिदेशक कृषि विस्तार जालोर के डॉ. केएन सिंह ने विभिन्न सरकारी योजनाओं की भी जानकारी दी।
किसानोंको दिए 200 किट : गतवर्ष वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सुझावों पर कार्यवाही रिपोर्ट पेश करते हुए केंद्र के प्रधारी मोहनलाल मीणा ने बताया कि केंद्र की ओर से कम पानी कम समय में तैयार होने वाली किस्मों के बीज ग्वार, मूंग, अरण्डी, सरसों, जीरा ईसबगोल समेत करीब 200 किट बीज किसानों को दिए गए। वहीं 150 किसानों को शामिल करते हुए पांच दिवसीय शिविर में कृषि पशुपालन संबंधी जानकारी दी गई। मीणा ने बताया कि शिक्षण के माध्यम से करीब 1152 किसानों कृषक महिलाओं को फसल तथा पशुपालन की नवीनतम कृषि तकनीक के बारे में जानकारी दी गई। केंद्र की ओर से यांत्रिक विधियां अपनाने के साथ-साथ बहुफसली खेती करने की सलाह दी गई।
होसकता है बेहतर दुग्ध उत्पादन : वहींगुडा मालानी बाड़मेर केंद्र के प्रभारी डॉ. जीवाराम वर्मा ने बताया कि जीरे अरण्डी में ड्राइकोवर्मा बीज उपचारित कर रोगरोधी किस्म जीसी-4 जीसीएच-7 किस्म बोकर फसलों को बीमारियों से बचाया जा सकता है।
क्षेत्रीय निदेशक डॉ. एसडी रतनू ने बताया कि केंद्र पर पशुओं के लिए नेपियर घास का प्रदर्शन किया गया है। इस घास को पशुओं को खिलाने से दूध का अच्छा उत्पादन किया जा सकता है।
केशवना अनुसंधान केंद्र में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते कृषि वैज्ञानिक।