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\"पूंजीपति घरानों के फायदे के लिए हो रहा सरकारी बैंकों का विलय\'

7 वर्ष पहले
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उद्योपतियों का सरकारी बैंकों में 3.50 लाख करोड़ बकाया

भास्करन्यूज | जालोर

ऑलइंडिया एसबीबीजे कॉर्डिनेशन कमेटी (संबद्ध एआईबीईए) के राष्ट्रीय सचिव एल.एन. जालानी के गुरूवार को जालोर आगमन पर बैंककर्मियों ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस दौरान यूनियन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जिले से ललित मेहता को सहायक सचिव एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य मनोनीत किया। बैंककर्मियों को संबोधित करते हुए जालानी ने बैंक कार्मिकों के वेतनवृद्धि संबंधी वार्ताओं की जानकारी देते हुए सेवा शर्तों पर हो रहे कुठाराघात के खिलाफ संघर्ष करने की आवश्यकता जताई।

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वहीं25 सितंबर को अखिल भारतीय मांग दिवस 15 अक्टूबर को देशभर के सभी केंद्रों पर एनपीए रिकवरी को लेकर मांग की जाएगी। इस अवसर पर स्थानीय बैंकों के प्रतिनिधियों समेत महेश शर्मा, ललित मेहता, हीरालाल घांची, बालूराम, असीम देबनाथ मनोज मोहन मौजूद थे।

उद्योगपतिघरानों में बैंकों के साढ़े तीन लाख करोड़ बकाया : जालानीसे भास्कर की विशेष बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि आरबीआई की ओर से जारी डिफॉल्टर्स की सूची के अनुसार बड़े पूंजिपतियों की देश भर के बैंकों में ब्याज सहित साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए की राशि बकाया चल रही है, जो अब तक चुकाई नहीं गई है। इसकी वसूली के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

विलय से कॉरपोरेट घरानों का फायदा

जालानीने बताया कि बैंकों का विलय कर सरकार कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाना चाहती है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में एसबीबीजे ने बीते वित्तीय वर्ष में 732 करोड़ का मुनाफा कमाया है जो एसबीआई से बेहतर है। उन्होंने कहा कि विलयीकरण के तहत ग्रामीण बैंकों को स्पॉन्सर बैंकों में विलय करना चाहिए। जिससे आमजन को भी सहुलियत मिल सके।

जालोर. बैठक को संबोधित करते एसबीबीजे कॉर्डिनेशन कमेटी के सचिव एलएन जालानी।