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सरकारी अस्पतालों का होगा औचक निरीक्षण, व्यवस्थाओं में जुटे अधिकारी
राज्यसरकार के आदेशानुसार जिला, उपजिला, प्राथमिक सामुदायिक चिकित्सा केंद्र पर अधिकारियों को औचक निरीक्षण के निर्देश जारी किए गए हैं। आदेश में 10 से 24 दिसंबर तक तक चिकित्सा विभाग के संयुक्त निदेशक खुद कभी भी इन अस्पतालों का निरीक्षण करने के लिए सकते हैं। इसे लेकर केवल सफाई व्यवस्था, बल्कि मरीजों को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए भी अस्पताल प्रशासन जुटा हुआ है। चिकित्सा मंत्री के आदेश के तहत सरकारी अस्पतालों में दिसंबर महीने में सघन निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान प्रशासनिक, मेडिकल और दूसरी व्यवस्थाओं से जुड़ी एक चेकलिस्ट भी सभी अस्पतालों को भेजी जा चुकी है। इस चेकलिस्ट के 40 से भी अधिक सवालों का जवाब अस्पताल प्रशासन से मांगा गया है।
सघननिरीक्षण के दौरान इन कार्यों की होगी जांच
सघननिरीक्षण के दौरान परिसर और शौचालयों की साफ-सफाई, हरियाली की स्थिति, मरीजों के पलंग और उस पर बिछाए जाने वाले चद्दर, लेबर रूम, ओपीडी रजिस्टर, पंखे और कूलर की स्थिति, 104 और 108 एंबुलेंसों की स्थिति, बायोमेडिकल वेस्ट के लिए की गई व्यवस्था, निशुल्क दी जाने वाली दवाओं की संख्या और उनके स्टॉक, पेंटावेलेंट वेक्सीन की उपलब्धता, चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ की संख्या, कुपोषण के उपचार, एक्सरे और सोनोग्राफी मशीन, ऑपरेशन थिएटर में मेडिकल उपलब्धता और इंजेक्शन रूम में पुरुष और महिलाओं की प्राइवेसी जैसे कई विषयों की जांच की जाएगी। इनसे जुड़ी सूचनाएं भी चेकलिस्ट के तहत तैयार रखने को कहा गया है। अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिया है कि उन्हें आवंटित बजट में से ही इनमें से ज्यादातर सुविधाओं को पूरा करवाएं। इसका फायदा यह होगा कि जनवरी महीने के प्रथम सप्ताह में चिकित्सा मंत्री की अध्यक्षता में संयुक्त निदेशक, सीएमएचओ और पीएमओ की समीक्षा बैठक होगी जिसमें सघन जांच अभियान के दौरान सामने आने वाली सरकारी अस्पतालों की कमियों को दूर किया जाएगा।
लगेंगेसाइन बोर्ड भी
आदेशके तहत सभी सरकारी चिकित्सालयों को सड़क पर साइन बोर्ड भी लगवाने पड़ेंगे ताकि पता चल सके कि अस्पताल का प्रवेश द्वार कहां है और कौनसी सुविधा कहां मिलेगी।
वर्तमानमें राजकीय अस्पताल की वास्तविक स्थिति
इसवक्त जिले के सबसे बड़े अस्पताल में स्वीकृत 45 में से 30 डॉक्टर्स के पद रिक्त पड़े हैं, जबकि ट्रोमा सेंटर में एक भी डॉक्टर नहीं है। नियमानुसार