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किसानों का पैदल मार्च शुरू

5 वर्ष पहले
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पानी नहीं मिला तो फसलें हो जाएगी बर्बाद

भास्करन्यूज | गुडा बालोतान

जवाईकमांड क्षेत्र के 22 राजस्व गांवों में जवाई नहर प्रणाली से सिंचाई करने के लिए अंतिम चौथी पाण का पानी रविवार की रात को बंद कर दिया गया। जवाई नहर से पानी की आवक बंद होने के साथ ही नहरे माइनरों के साथ सभी टेल सूख गई। सिंचाई विभाग की ओर से साढ़े 18 दिन के बजाय नौ दिनों में ही नहर का पानी बंद करने से किसानों को परेशानी में डाल दिया हैं।

किसानों ने आरोप लगाते हुए कहा कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से जवाई बांध से पिछली तीन पाण के दौरान छोड़े पानी की गणना सही ढंग से नहीं करने से अंतिम पाण के लिए केवल 400 एमसीएफटी पानी ही बचा हुआ था। जिसे सिंचाई विभाग ने जैसे तैसे कर नौ दिनों तक चला लिया। उसके बाद बांध में सिंचाई के लिए पानी नहीं बचा तो सिंचाई विभाग ने पानी बंद कर दिया।

जलसकती हैं 4 हजार हैक्टेयर में गेहूं तथा टेल में 500 हैक्टेयर में खड़ी जीरे ईसबगोल की फसल : जवाईकमांड क्षेत्र में जवाई नहर प्रणाली से जुड़े करीब 4 हजार हैक्टेयर रकबे में गेहूं की फसल खड़ी है। वही बिठूडा अगवरी टेल के करीब 500 हैक्टेयर में देशी जीरे ईसबगोल की फसल खड़ी है। फसलों की बुवाई के लिए चार पाण सिंचाई का पानी देना तय किया था। जिसमें से तीन पाण पूरी हो चुका है। मगर अंतिम पाण में सिंचाई का पानी बीच में ही बंद करने से अंतिम सिंचाई का पानी नहीं मिलने से किसानों की महंगी फसल जलने के कगार पर है। जानकारी के अनुसार गुड़ा बालोतान आरआई सर्कल के बिठूड़ा जोड़ा, हरजी आरआई सर्कल के अगवरी, उम्मेदपुर आरआई सर्कल के उम्मेदपुर, मालपुरा, मोरू, बैदाना, हरियाली, सुगालिया बालोतान, सेदरिया बालोतान, पावटा, रसियावास शेष|पेज15



अलावाचांदराई आरआई सर्कल के चांदराई, उखरड़ा, पादरली, कवराड़ा, थुंबा, नारवणा, मानपुरा, रोड़ला, गुड़ा इंद्रपुरा इन 22 गांवों के रकबों को सिंचित करने के लिए जवाई नहर से पिछले तीन माह के दौरान तीन पाण का पानी दिया था। चौथी पाण का पानी अभी चल ही रहा था कि जवाई बांध में सिंचाई के पानी का स्टोरेज खत्म होने के साथ ही नहरों को पानी देना बंद कर दिया।

आहोर तहसील के इन 22 गांवों के जवाई कमांड क्षेत्र का कुल रकबा 9746.83 हैक्टेयर यानि 24367.07 एकड़ है। जिसमें से करीब चार हजार हैक्टेयर में गेहूं की फसल, तीन हजार हैक्टेयर में रायड़ा एवं इसके अलावा देशी जीरा, ईसबगोल चने की फसल खड़ी है। इन रबी फसलों में रायड़ा चने की फसल को छोड़कर गेहूं , जीरा ईसबगोल की फसल को अंतिम पाण का पानी मिलना जरूरी है। ऐसे में चौथी पाण का पानी नहीं मिलता है तो किसानोंं की पिछली तीन महिनों की मेहनत जल सकती हैं।

किसानोंने सुमेरपुर से जवाई बांध के लिए किया पैदल कूच

जवाईबांध से नहरी सिंचाई के लिए दी जा रही अंतिम चौथी पाण का पानी रविवार रात को अचानक बंद करने पर सोमवार सवेरे जालोर पाली जिले के जवाई कमांड क्षेत्र के हजारों किसान सुमेरपुर उपखंड मुख्यालय पर जमा हो गए। यहां से किसान संघर्ष समिति, किसान संघ नहरी संगम अध्यक्षों के नेतृत्व में सुमेरपुर एसडीएम से वार्ता कर समाधान करवाने का निर्णय लिया गया। मगर सुमेरपुर प्रशासन के साथ जवाई नहर खंड के अधिकारियों ने सिंचाई का पानी देने के मामले में पूरी तरह से हाथ खड़े कर दिए। इसपर गुस्साए जवाई कमांड के हजारों किसान धरना प्रदर्शन पर उतारु होने के साथ सुमेरपुर कृषि मंडी में जाकर धरने पर बैठ गए। जहां मंगलवार शाम तक समस्या का समाधान होने का इंतजार किया। समाधान नहीं होते देख करीब सात आठ हजार किसान सुमेरपुर से जवाई बांध के लिए पैदल कूच किया। किसानो ने बताया कि सुमेरपुर से जवाई बांध तक के पैदल मार्च में ज्यादा समय लगा तो जहां अंधेरा होगा वहीं बीच रास्ते में सभी किसान डेरा डाल देंगे।

पानी नहीं मिला तो तेज करेंगे आंदोलन

^जवाईबांध से दी जा रही अंतिम पाण का पानी सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से बंद हुआ है। किसानों को अंतिम सिंचाई के लिए पानी नहीं मिला तो आंदोलन तेज किया जाएगा। सात आठ हजार किसानों ने सुमेरपुर से धरना हटा जवाई बांध के लिए पैदल कूच कर दिया है। जयेंद्रसिंहगल्थनी, जवाई किसान संघर्ष समिति, सुमेरपुर

^किसानोंको जवाई नहर से अंतिम पाण की सिंचाई का पानी दिलवाने के लिए हमारा प्रयास जारी है। राज्य सरकार से भी वार्ता चल रही उम्मीद है कोई रास्ता जरूर निकलेगा। शंकरसिंहराजपुरोहित, विधायक आहोर

गुडाबालोतान. सुमेरपुर में धरने पर बैठे जवाई कमांड क्षेत्र के किसान।

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