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जालोर गैस एजेंसी ने जले हुए सिलेंडर, रेगुलेटर पाइप नहीं बदला, उपभोक्ता मंच ने लगाया साढ़े सात हजार का जुर्माना

5 वर्ष पहले
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जालोर| जिलाउपभोक्ता विवाद प्रतितोष मंच ने जालोर गैस सर्विस के खिलाफ एक उपभोक्ता की सेवा में त्रुटि पर साढ़े सात हजार रुपए की राशि का जुर्माना लगाते उपभोक्ता को क्षतिपूर्ति राशि अदा करने के आदेश दिए हैं। वहीं आदेश की पालना नहीं करने पर भारत पेट्रोलियम एवं एलपीजी कॉर्पोरेशन को जालोर गैस सर्विस की एजेंसी निरस्त करने की कार्यवाही करने को भी कहा है। इधर, इस आदेश के खिलाफ जालोर गैस सर्विस ने राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग जोधपुर में अपील भी की थी, लेकिन वहां भी अपील को खारिज कर दिया है।

सिलेंडरका रेगुलेटर पाइप जल गया था : शहरके फोलावास निवासी कानमल जैन पुत्र नथमल ने 8 जनवरी 2015 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष मंच में परिवाद पेश कर बताया था कि उसने 9 जून, 1983 को जालोर गैस सर्विस से 750 रुपए में गैस कनेक्शन तथा 50 रुपए में रेगुलेटर लिया था। 30 अक्टूबर 2014 को उसके घर पर खाना बनाते समय अचानक आग लगने से गैस सिलेंडर, रेगुलेटर पाइप पूर्ण रूप से जलकर नष्ट हो गए थे। इस संबंध में कोतवाली थाने में रिपोर्ट भी दी थी। इसके बाद 12 नवंबर 2014 को हेल्प लाइन में प्रार्थना पत्र पेश कर बताया था कि गैस एजेंसी उसे सिलेंडर, रेगुलेटर पाइप बदलकर नया नहीं दे रहा है। जिससे उसने उपभोक्ता की सेवा में त्रुटि की है।

दोनोंपक्षों को सुनने के बाद यह दिए आदेश : दोनोंपक्षों को सुनने के बाद जालोर गैस सर्विस के खिलाफ आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए 17 मई 2015 को मंच ने आदेश दिया। शेष|पेज15

किगैस एजेंसी जला हुआ गैस सिलेंडर, रेगुलेटर गैस पाइप बदलकर देवे तथा उपभोक्ता को मानसिक शारीरिक वेदना की क्षतिपूर्ति के रूप में 5 हजार एवं परिवाद व्यय के 2500 रुपए अदा करे। एक माह के भीतर निर्णय की पालना नहीं होने पर परिवाद प्रस्तुत करने की तारीख 8 जनवरी 2015 से उपभोक्ता 9 प्रतिशत वार्षिकी दर से ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी रहेगा। शेष|पेज13

वहींउन्होंने भारत पेट्रोलियम एवं एलपीजी कॉर्पोरेशन को निर्देश दिया कि एजेंसी की ओर से निर्णय की पालना नहीं करने पर एजेंसी को निरस्त किए जाने की नियमानुसार कार्यवाही करे साथ ही आम गैस उपभोक्ताओं को सही सेवाएं देने के लिए सही कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति या फर्म को एजेंसी दी जाने की कार्यवाही करे। फैसला मंच अध्यक्ष दीनदयाल प्रजापत सदस्य केशरसिंह राठौड़ मंजू राठौड़ की बैंच ने सुनाया। वहीं प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता तरुण सोलंकी ने पैरवी की।

फैसले के खिलाफ राज्य आयोग में अपील की, लेकिन वहां भी खारिज

इस फैसले के विरुद्ध जालोर गैस एजेंसी ने राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में अपील दायर की। जिस पर आयोग ने सुनवाई करते हुए यह माना कि गैस एजेंसी का यह दायित्व था कि वह समय-समय पर सिलेंडर, रेगुलेटर पाइप की जांच करते। आयोग ने एजेंसी की अपील खारिज कर दी।

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