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महिलाओं को सत्ता मिली पर दखलंदाजी के साथ
संसदीयलोकतंत्र में महिलाआें की भागीदारी सुनिश्चित करता महिला अारक्षण विधेयक भले ही राजनीतिक दलों की दुरभिसंधि के चलते बरसों से अटका हो लेकिन लोकतंत्र की पहली सीढी ग्राम पंचायत शहरी निकायों में अारक्षण की बदौलत महिलाओं को भागीदारी निभाने का मौका मिल रहा है। शहरों में जहां महिलाएंं जनप्रतिनिधि के रूप में बखूबी दायित्व निभा रही हैं वहीं ग्राम पंचायतों में महिलाओं को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। महिला सरपंचोें के मामले में अक्सर परिजनाें का दखल रहता है चाहे वह पति हो या पुत्र अथवा ससुर। राजनीतिक परिवारों की महिलाओं के लिए तो दखल को रोकना आैर भी मुश्किल हो जाता है।
वर्ष 1983 में संविधान के 73वें और 74वें संविधान संशोधन के तहत महिलाओं को पंचायती राज में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया। वहीं वर्ष 2009 में पंचायती राज में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार ने 50 प्रतिशत आरक्षण दे दिया। कानून बनने से महिलाआें की भागीदारी तो बढ़ी लेकिन महिलाओं को कितना फायदा हुआ यह शोध का विषय है। हकीकत यह है कि पंचायतों में ऐसी सरपंचों की संख्या कम ही होगी जो स्वतंत्र रूप से दायित्व निभा रही हैं और शिक्षित सक्षम हैं अन्यथा अधिकतर सरपंच किसी किसी रूप में परिजनाें पर निर्भर हैं, चाहे वह पति हो या पुत्र, अथवा ससुर या देवर। अशिक्षित या अल्पशिक्षित सरपंच के मामले में परिजन मदद के बहाने दखल करते हैं लेकिन शिक्षित राजनीतिक परिवार से होने के बाद तो दखल अधिकार बन जाता है। राजनैतिक परिवार से आने वाली महिला सरपंच के परिजन ही पंचायत के काम-काज में हावी रहते हैं। पढ़ी-लिखी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक महिला सरपंच को गुटबाजी विरोधी खेमों से जूझना पड़ता है। इसके अलावा कई अन्य सामाजिक,आर्थिक परिवारिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। जवाजा पंचायत समिति की 35 ग्राम पंचायतों में 21 महिला सरपंच है। ग्राम पंचायत में अधिकांश महिला सरपंचों के परिजन ही ग्राम पंचायत के कामकाज निपटाते हैं। वहीं परिजनों द्वारा सरपंच के जाली हस्ताक्षर करके भ्रष्ट्राचार करने पर सारा का सारा इल्जाम भी महिला सरपंच के सर पर ही आता है।
केस : 2
केस : 3
केस : 1
जागरूक करते हैं
^विभागमहिला सरपंचों अन्य जनप्रतिनिधियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए समय-समय पर पंचायत समिति स्तर पर कार्यशाला शिविर आयो