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जिला प्रमुख प्रधान को विकास का अधिकार

6 वर्ष पहले
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पंचायत राज की अहम कड़ी हैं सरपंच, प्रधान और जिला प्रमुख

भास्कर नॉलेज

पंचायतीराज की तीन स्तरीय व्यवस्था में जिला प्रमुख प्रधान अहम होते हैं। जिले में पंचायत चुनाव के परिणाम चुके हैं। जिला प्रमुख 8 पंचायत समितियों में प्रधान का चुनाव शनिवार को हो गया है।

तीन स्तरीय व्यवस्था में सरपंच, प्रधान जिला प्रमुख ही अहम कड़ी हैं। आइए जानते हैं कि इन प्रतिनिधियों के अधिकार आखिर हैं क्या दरअसल, जिला प्रमुख, जिला परिषद सदस्य , प्रधान, पंस सदस्य, सरपंच तथा वार्ड पंच कड़ी के रूप में गांवों का समुचित विकास करने में सक्षम होते हैं। जिला प्रमुख का पंचायती राज संस्थाओं पर नियंत्रण रहता है। जिला परिषद का सालाना बजट लगभग करीब पांच सौ करोड़ रुपए का होता है।

जिला प्रमुख का यह अधिकार होता है कि वह पिछड़े क्षेत्र के लिए पर्याप्त राशि मुहैया करा सके। प्राकृतिक आपदा या जन-धन हानि में स्व विवेक से 1 लाख रुपए की राशि जारी करने का अधिकार प्रमुख के पास है। बाद में इस राशि का पुनर्भरण राज्य सरकार कर देती है। 20 हजार के ऊपर के सभी चेक जिला प्रमुख साइन करता है, जिसकी अधिकतम सीमा नहीं है।

विवादका फैसला भी सुनाते हैं प्रमुख प्रधान

जिलाप्रमुख प्रधान गांवों में होने वाले आपसी विवादों का फैसला भी सुनाते हैं। ऐसा अधिकार सरपंच को भी है। इनके निर्णय को एक माह में संभागीय आयुक्त के यहां चुनौती दी जा सकती है। पेयजल या स्वच्छता के संबंध में जरूरी होने पर प्रधान अविलंब स्वीकृति जारी कर सकते हैं। योजना के संचालन पर नियंत्रण, उनके कार्यों की गुणवत्ता और पेमेंट पर इनकी निगरानी होती है। जिला प्रमुख तीन महीने में एक बार साधारण सभा की बैठक लेता है। हर महीने स्थाई समिति की बैठक लेता है। प्रधान हर महीने साधारण सभा स्थाई समिति की बैठक लेता है।

भास्कर न्यूज. झालावाड़

पंचायतीराज की तीन स्तरीय व्यवस्था में जिला प्रमुख प्रधान अहम होते हैं। जिले में पंचायत चुनाव के परिणाम चुके हैं। जिला प्रमुख 8 पंचायत समितियों में प्रधान का चुनाव शनिवार को हो गया है।

तीन स्तरीय व्यवस्था में सरपंच, प्रधान जिला प्रमुख ही अहम कड़ी हैं। आइए जानते हैं कि इन प्रतिनिधियों के अधिकार आखिर हैं क्या दरअसल, जिला प्रमुख, जिला परिषद सदस्य , प्रधान, पंस सदस्य, सरपंच तथा वार्ड पंच कड़ी के रूप में गांवों का समुचित विकास करने में सक्षम होते हैं। जिला प्रमुख का पंचायती राज संस्थाओं पर नियंत्रण रहता है। जिला परिषद का सालाना बजट लगभग करीब पांच सौ करोड़ रुपए का होता है।

जिला प्रमुख का यह अधिकार होता है कि वह पिछड़े क्षेत्र के लिए पर्याप्त राशि मुहैया करा सके। प्राकृतिक आपदा या जन-धन हानि में स्व विवेक से 1 लाख रुपए की राशि जारी करने का अधिकार प्रमुख के पास है। बाद में इस राशि का पुनर्भरण राज्य सरकार कर देती है। 20 हजार के ऊपर के सभी चेक जिला प्रमुख साइन करता है, जिसकी अधिकतम सीमा नहीं है।

विवादका फैसला भी सुनाते हैं प्रमुख प्रधान

जिलाप्रमुख प्रधान गांवों में होने वाले आपसी विवादों का फैसला भी सुनाते हैं। ऐसा अधिकार सरपंच को भी है। इनके निर्णय को एक माह में संभागीय आयुक्त के यहां चुनौती दी जा सकती है। पेयजल या स्वच्छता के संबंध में जरूरी होने पर प्रधान अविलंब स्वीकृति जारी कर सकते हैं। योजना के संचालन पर नियंत्रण, उनके कार्यों की गुणवत्ता और पेमेंट पर इनकी निगरानी होती है। जिला प्रमुख तीन महीने में एक बार साधारण सभा की बैठक लेता है। हर महीने स्थाई समिति की बैठक लेता है। प्रधान हर महीने साधारण सभा स्थाई समिति की बैठक लेता है।