रायपुर में पहली बार मल्चिंग खेती
रायपुर| रायपुरमें खेती करने वाले किसान खेतों में उगने वाले खरपतवार से हमेशा परेशान होते रहते है और इसको नष्ट करने के लिए हजारों रुपए के कीटनाशक का प्रयोग करने के बाद भी हर वर्ष खरपतवार की समस्या बनी रहती है। इस समस्या के समाधान के लिए जिले में पहली बार मल्चिंग(बरसाती) खेती का प्रयोग रायपुर क्षेत्र के सेमली भवानी गांव में जागरूक किसान ने अपने खेत पर किया। सेमली भवानी गांव निवासी रामबाबू पाटीदार ललित पाटीदार ने बताया कि मल्चिंग खेती के लिए पहले कृषि विज्ञान केन्द्र से जानकारी लेनी पड़ती है। इस खेती पर कृषि उद्यान विभाग द्वारा अनुदान भी दिया जाता है। अभी एक हेक्टेयर मिर्च की खेती की जा रही है। इस खेती से किसान को खरपतवार की समस्या से छुटकारा मिलता है तथा खेती में बीमारियों का खतरा भी नहीं रहता है। इससे फसलों में होने वाले रोगों की संख्या में 70 प्रतिशत तक कमी आती है। इस खेती के प्रयोग के लिए सबसे पहले खेत में बरसाती लगाई जाती है और उसमें छेद कर पौधे रोपे जाते है।
बरसाती के अंदर ड्रिप के द्वारा पानी बरसाती के अंदर से ही जमीन में जाता है ऊपर सफेद अंदर काले कलर की बरसाती लगाई जाती है। बरसाती ऊपर की गर्मी को अंदर समान रूप से पहुंचाती है। इस संबंध में रामराज मीणा कृषि विज्ञान केन्द्र उद्यान विभाग झालावाड़ ने बताया कि यह खेती झालावाड़ जिले में पहला प्रयोग है इस खेती से खरपतवार रोगों की समस्या से लोगों को छुटकारा मिलेगा।
>रायपुर. जिले में पहली बार किया गया मल्चिंग खेती का प्रयोग।