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बच्चों को कराया जाएगा गागरोन दुर्ग का भ्रमण
गड्ढे देख कोटा से लौट जाते विदेशी पावणे
कोटासे झालावाड़ तक नेशनल हाइवे पर हो रहे बड़े-बड़े गड्ढों के चलते विदेशी पर्यटक यहां आने से कतरा रहे हैं। इसी का नतीजा है कि चार सालों में विदेशी पर्यटकों की संख्या में तेजी से गिरावट आई है। जिले में विश्व धरोहर गागरोन दुर्ग, बौद्ध कालीन कोल्वी की गुफाएं, महू बोरदा के महल, दहलनपुर सहित अन्य पुरातात्विक और पर्यटक महत्व के स्थल हैं। इनको देखने के लिए विदेशी पर्यटक यहां आना तो चाहते हैं, लेकिन सड़कों के हिचकोले उनसे बर्दाश्त नहीं होते हैं। इसी को देखते हुए विदेशी पर्यटक अब झालावाड़ की ओर से मुंह मोड़ने लगे हैं।
यहां वर्ष 2010 में 214 विदेशी आए थे। इनकी संख्या 2013 में तेजी से घटी, यहां विदेशी पर्यटक 80 ही पाए। इस साल भी जनवरी से जुलाई तक केवल 49 विदेशी पर्यटक ही जिले में आए। ऐसे में विदेशी पर्यटकों की घटती संख्या को देखते हुए पर्यटन विभाग भी चिंतित है। यहां के प्रसिद्ध चंद्रभागा मेले में ही विदेशी पर्यटक अधिक संख्या में आते हैं। इसके तहत उनको यहां के पर्यटन स्थलों की सैर करने के साथ ही मेले में भी विभिन्न कार्यक्रमों से भारतीय संस्कृति के दर्शन होते हैं।
^ विदेशी पर्यटकों की पिछले साल भी बुकिंग अच्छी हुई थी, लेकिन सड़कों की हालात खराब होने के कारण कैंसिल हुई। विदेशी पर्यटकों की संख्या घटने का एक प्रमुख कारण नेशनल हाइवे की खराब हालात है। -बाबूलालरैगर, सहायकनिदेशक पर्यटन विभाग
किले को आकर्षक बनाया जाए
इंटेकके जिला संयोजक राजऋषि सिंह हाड़ा ने बताया कि गागरोन दुर्ग में विदेशी पर्यटक तो आते हैं, लेकिन यहां उनके लिए पानी तक की सुविधा नहीं मिल पाती है। गागरोन दुर्ग में जो बजट खर्च किया जाए उससे इसकी मरम्मत कार्य के अलावा इसको अर्टेक्टिव बनाने पर भी जोर दिया जाना चाहिए। यहां रामबुर्ज पर रेस्टोरेंट और व्यू पाईंट बनाया जाना चाहिए। मधुसुदन मंदिर को म्यूजियम के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। नदी में वोटिंग शुरू की जानी चाहिए।
गढ़पैलेस में बनेगी पर्यटन इकाई
यहांपर्यटन विभाग की ओर से गढ़ पैलेस पर्यटन इकाई के रूप में विकसित होगा। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पिछले कार्यकाल में यहां के लिए 30 लाख रुपए से जीर्णोद्वार कार्य हुए थे। इसके तहत यहां म्यूजियम शिफ्ट हुआ था। अब इसके लिए फिर से प्रथम किश्त के रूप में पर्यटन विभाग के पास 50 लाख