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रखरखाव के अभाव में टूटी हरिश्चंद्र सागर बांध की दीवारें

6 वर्ष पहले
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हीचरगांव के समीप हरिश्चंद्र सागर परियोजना के बांध की दीवारें लंबे समय से टूटी हुई हैं। रखरखाव के अभाव में क्षेत्रवासियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। हरिश्चंद्र सागर परियोजना के बांध की नींव राज राणा हरिश्चंद्र सिंह ने 1956 में रखी थी। यहां पर बांध के स्थान पर एक मिनीडेम का निर्माण कराया गया था। पहली बार आए उफान में ही मिनीडेम की दीवार बह गई। इस डेम से 40 किमी लम्बी नहर झालावाड़ कोटा जिले के दो सौ करीब गांवों की 10 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित करती थी। इस समय कुछ गांवों तक ही सिमट गई है। हीचर गांव के पास से निकल रही हरिश्चंद्र सागर परियोजना की नहर के बांध की नींव राज राणा हरिशचन्द सिंह ने 1956 में रखी थी। यहां पर बांध के स्थान पर एक मिनीडेम का निर्माण कराया गया था। पहली बार आए नदी में उफान में ही मिनीडेम की सौ फीट करीब लम्बी दीवार बह गई। इस बाध से 40 किलोमीटर लम्बी नहर झालावाड़ कोटा जिले के दो सौ करीब गांवों की 10 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित करती थी। परन्तु इस के रखरखाव पर कोई ध्यान देने से कुछ ही गांवों तक इसका पानी पहुंच पाता है। किसान संघ के अधिकारियों ने इसके लिए धरने प्रदर्शन किए थे, लेकिन कोई हल नहीं निकलने से किसानों में निराशा है। बांध टूटी दीवार को ठीक कराने के लिए 10 वर्ष पूर्व 18 लाख स्वीकृृत होकर विभाग के खजाने में पड़े रहे, लेकिन अधिकारियों की अनदेखी के चलते मिनीडेम की दीवार नहीं बन सकी। इसी तरह तीन वर्ष से राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत 80 लाख रुपए मुख्य नहर के रखरखाव के लिए स्वीकृत हो रहे हैं। अभी तक मस्टररोल शुरू नहीं की गई है। नहर हेड से टेल तक जगह जगह दीवारें ढह कर मलवे से अटी पड़ी हुई है। जिसकी सुध किसी भी अधिकारियों ने आज दिन तक नहीं ली है। इस संबंध में जलसंसाधन विभाग के एक्सईएन आरके जैमन ने बताया कि राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना में 80 लाख की स्वीकृति है, जिसमें से सात कार्य कराए जाएंगे। इस समय एक करोड़ से प्रमुख स्थानों पर क्षतिग्रस्त दीवारों को बनाया जा रहा है।

पनवाड़. मलबे से अटी पड़ी मुख्य नहर।

पनवाड़. क्षतिग्रस्त पड़ा हरिश्चंद्र सागर बांध।