सालभर में 15 करोड़ की हो रही बिजली चोरी
जिलेके विद्युत तंत्र में सुधार के बावजूद एक साल में 15 करोड़ रुपए से ज्यादा की बिजली चोरी हो रही है। इस पर नियंत्रण के लिए अधिकारियों के पास कोई प्लान नहीं है और ही अभी तक कोई प्रभावी कदम उठाए गए। छिट -पुट कार्रवाई कर औपचारिकता पूरी कर ली जाती है, इससे बिजली चोरी का ग्राफ बढ़ रहा है।
एपीडीआर पी समेत अन्य कार्यक्रमों पर करोड़ों रुपए खर्च कर बिजली तंत्र को मजबूत किया गया। इसका मकसद उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली देने के साथ चोरी को कम करना था, लेकिन इन प्रयासों के बाद 40.66 प्रतिशत बिजली चोरी हो रही है। पिछले सत्र 2013-14 में 7797.24 लाख यूनिट बिजली ली गई, लेकिन इसमें सिर्फ 4626.55 लाख यूनिट की ही बिलिंग हो सकी। जबकि 3170.69 लाख यूनिट बिजली चोरी-छीजत में चली गई। इससे निगम को 15 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है। नए सत्र में भी बिजली चोरी का ग्राफ नहीं घटा सका। इतना बड़ा नुकसान होने पर भी विद्युत निगम ने इसके नियंत्रण के लिए अभी तक कोई पहल नहीं की है। इस कारण लोग बेखौफ होकर बिजली चोरी कर रहे हैं। कमोबेश यही हालात झालावाड़ शहरी क्षेत्र के हैं।
बड़े और व्यावसायिक उपक्रमों पर नहीं करते कार्रवाई- बिजली निगम ने यूं तो कार्रवाई के लिए सतर्कता विभाग बना रखा है, लेकिन इस विंग ने जनवरी से लेकर अभी तक एक भी बड़ी कार्रवाई नहीं की है। कुछ घरेलू मीटरों की चेकिंग कर वीसीआर भरने और आंकड़े हटवाने तक कार्रवाई सिमट कर रह गई है। होटल और बड़े व्यावसायिक उपक्रमों पर अभी तक कार्रवाई नहीं कर पाए हैं। विद्युत निगम के अभियंताओं का मानना है कि शहर में आंकड़े डालकर, मीटर बाइपास और केबल कट करके बिजली चोरी की जा रही है। कई क्षेत्रों में एसी चलाने के लिए लोग चालू लाइनों पर आंकड़े डालते हैं। जबकि ग्रामीण अंचल में भी लगातार चोरी हो रही है।
^चोरीऔर छीजत में कमी लाने के लिए समय-समय पर सतर्कता जांच एवं सिस्टम में वांछित सुधार किए जा रहे हैं। फीडरों का सर्वे करवा लिया है, उनकी मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। एनपीगोयल, एसई,विद्युत निगम, झालावाड़