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पुराने भवनों में ही चल रहे मर्ज हुए 308 में से 41 स्कूल

7 वर्ष पहले
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प्रारंभिकसे माध्यमिक शिक्षा में एकीकरण के तहत स्कूल मर्ज तो कर दिए गए, लेकिन इसका फायदा अब भी शिक्षा विभाग को नहीं मिल पा रहा है। जिले में 41 से अधिक ऐसे स्कूल हैं जो अभी भी पुराने भवनों में ही चल रहे हैं। केवल शिक्षक मर्ज वाले स्कूलों में रजिस्टर में हाजिरी भरने आते हैं। इससे सरकार की शिक्षकों के समानीकरण की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है। गौरतलब है कि शहरी और सड़क किनारे स्कूलों में शिक्षकों की अधिकता और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए एकीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसके तहत जिले में 308 स्कूलों को मर्ज कर दूसरे स्कूलों में शामिल किया गया था। सरकार की मंशा है कि जिन स्कूलों को बंद किया गया है, उनमें से अधिक शिक्षकों को ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में लगाया जाए, लेकिन अभी कई स्कूलों में संसाधनों की कमी तो कई में शिक्षकों के रुचि नहीं लेने से अधिकतर स्कूल पहले की तरह ही चल रहे हैं। घाटोली स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल में छह कमरे हैं। यहां 241 स्टूडेंट्स अध्ययनरत हैं। इसमें राजकीय प्राथमिक स्कूल घाटोली को मर्ज किया गया। इसमें 82 बच्चे अध्ययनरत हैं, लेकिन प्राथमिक स्कूल अपनी पुरानी जगह पर ही संचालित हो रहा है। इसी तरह के हालात मंडावर, महू बोरदा सहित कई जगहों के स्कूलों के हैं। यहां भी अभी तक बच्चों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट नहीं कर पुराने भवन में ही बैठा जा रहा है।

^जिलेमें 41 स्कूलों ने जगह की तंगी के कारण उसी स्कूल में अध्ययन करवाने की परमिशन मांगी है। इसके लिए डीडी को पत्र भेजे गए हैं। चंद्रकलामीणा, डीईओ(माध्यमिक), झालावाड़।

पांचस्कूल एक साथ कर दिए मर्ज

यहांराजकीय माध्यमिक स्कूल कलेक्ट्री में पांच स्कूलों को एक साथ मर्ज कर दिया गया। इससे खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कलेक्ट्री स्कूल माध्यमिक होने के चलते यहां पहले ही जगह की तंगी है। इसके बावजूद यहां पर पांच स्कूलों को मर्ज किया गया। मजेदार बात तो यह है कि जिन स्कूलों को मर्ज किया गया, उनमें भी काफी अधिक बच्चे अध्ययनरत हैं। इसी तरह राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल आदर्श को भी राजकीय नेहरू उच्च प्राथमिक स्कूल में मर्ज किया गया। दोनों स्कूलों में छात्र संख्या अधिक होने से व्यवस्थाएं गड़बड़ा रही हैं।

पोषाहारकी राशि मिलने में भी हुआ संकट

उच्चप्राथमिक स्कूल