- Hindi News
- िवत्तीय स्वीकृति पर टिकी मरीजों की सुविधाएं
िवत्तीय स्वीकृति पर टिकी मरीजों की सुविधाएं
झालावाड़मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल में आने वाले मरीजों को कैथ लैब, एमआरआई, सहित अन्य जांचों की सुविधा मिलना तय है, लेकिन पिछले 9 महीनों में एक बार भी गवर्निंग काउंसिल (शासकीय मंडल की बैठक) नहीं होने से इन जांचों की मशीनों की खरीद को वित्तीय स्वीकृति नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज के मेडिकोज को मिलने वाली सुविधा, डॉक्टर नर्सिंगकर्मी के प्रमोशन, डीए सहित उनकी मांगें आदि भी अटकी हुई हैं।
नई सभी सुविधाओं, समस्याओं आदि पर गवर्निंग काउंसिल की मीटिंग में निर्णय लिया जाना है, लेकिन नई सरकार बनने के बाद एक बार भी मीटिंग नहीं होने से मरीज मिलने वाली सुविधाओं से वंचित हैं। पिछले 9 माह से मीटिंग नहीं होने से डॉक्टरों में भी असमंजस है। उनके कई काम अटके हुए हैं। वैसे तो हर तीन माह में गवर्निंग कांउसिल की मीटिंग होती है और अब तक तो तीन बार मीटिंग हो जानी चाहिए थी। गत वर्ष मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रशासन द्वारा कैथलैब, एमआरआई, अत्याधुनिक सीटी स्कैन मशीन, सोनोग्राफी मशीन आदि के प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेजे गए थे। इनमें से कई मशीनों की खरीद पर गवर्निंग काउंसिल की बैठक में निर्णय लिया जाना था। इस मीटिंग में झालावाड़ मेडिकल कॉलेज एंड सोसायटी के चेयरमैन कलेक्टर, मेडिकल कॉलेज के डीन, अस्पताल अधीक्षक आदि को भाग लेना होता है।
पिछली मीटिंग में मिली थी स्वीकृति
गवर्निंगकाउंसिल की मीटिंग गत वर्ष 13 दिसंबर 2013 को हुई थी। इसमें कैथ लैब, एमआरआई मशीन, 64 सीटी स्कैन मशीन सहित अन्य मशीनों के करीब 20 करोड़ के प्रस्ताव भेजे गए थे। इस मीटिंग में झालावाड़ मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल के लिए इन मशीनों को आवश्यक मानते हुए मंगवाने की स्वीकृति मिल गई थी और अगली मीटिंग में इसको वित्तीय स्वीकृति मिलनी थी, लेकिन पिछले 9 माह में यह बैठक हुई ही नहीं। कैथ लैब के लिए सर्वे हो चुका है। जमीन का आवंटन हो चुका है, लेकिन अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ।
टीचरएसोसिएशन भी परेशान
गवर्निंगकाउंसिल की बैठक नहीं होने से टीचर एसोसिएशन से जुड़े डॉक्टर भी परेशान हैं। यह मीटिंग हो तो उनके प्रमोशन को हरी झंडी मिल सके। इसके अलावा एसोसिएशन की डिमांड थी कि उनको छुट्टियों के लिए कलेक्ट्रेट के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसके लिए इस मीटिंग में फैसला होना था, लेकिन ये अटकी हुई हैं। वित्तीय वर्ष के बाद उनको डीए भत्तों