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सरकार से पैसा लिया, नहीं बनाए इंदिरा आवास

7 वर्ष पहले
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इंद्राआवास और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत जिले के गरीब परिवार के लोगों ने सरकारी पैसा तो उठा लिया, लेकिन तीन साल में नींव तक नहीं खोदी। जिला परिषद के तहत पहले भी इंद्रा आवास योजना में मकान नहीं बनाने वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई हुई थी। अधिकारियों की ओर से कार्रवाई के नाम पर केवल रिपोर्ट दर्ज कराने की खानापूर्ति करने के चलते अब दूसरे ग्रामीणों के भी हौसले बुलंद होने लगे हैं। गौरतलब है कि इंद्रा आवास और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जिन लोगों के घर नहीं हैं, उनको आवास निर्माण के लिए राशि उपलब्ध कराई जाती है।

यह राशि तीन किश्तों में जारी होती है। ग्रामीणों ने राशि तो ले ली, लेकिन मकान नहीं बनवाए और उस राशि को दूसरे कामों में लगा दिया। ऐसे में सबको आवास देने का सरकार का लक्ष्य अधूरा ही है। मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पिछले सालों में राज्य में सबसे अधिक जिले को टॉरगेट प्राप्त हुए थे। सर्वे होने के बाद लोगों को योजना के तहत लाभ भी पहुुंचाया गया, लेकिन खाते में बजट जमा होने के बाद लोगों ने मकान बनाना मुनासिब नहीं समझा।

108 लोगों की मृत्यु, नहीं लौटाया पैसा

इंद्राआवास और मुख्यमंत्री आवास योजना में 108 लोग ऐसे सामने आए हैं, जिनके खातों में आवास योजना का पैसा जमा होने के बाद उनकी मृत्यु हो गई। अब उनके परिजन यह पैसा नहीं लौटा रहे हैं। ऐसे में जिला परिषद की ओर से ऐसे परिवारों का भौतिक सत्यापन करवाया जा रहा है। भौतिक सत्यापन में स्थिति सामने आएगी की मृत व्यक्तियों का पैसा किसी दूसरे ने तो नहीं उठा लिया।

रिपोर्टदर्ज कर दी खानापूर्ति

इंद्राआवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना की सच्चाई जानने के लिए जिला स्तर पर पहले भी भौतिक सत्यापन करवाया गया था, इसमें आवास का निर्माण नहीं करवाने वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के सभी बीडीओ को आदेश जारी किए गए थे। इसके बाद इन लोगों पर सख्त कार्रवाई कराने की जिम्मेदारी भी बीडीओ पर ही थी, लेकिन संबंधित बीडीओ ने केवल रिपोर्ट दर्ज कराकर खानापूर्ति कर ली। कई जगहों पर तो रिपोर्ट भी दर्ज नहीं हो पाई। ऐसे में आवास योजनाओं का बजट उठाकर मकान नहीं बनाने वाले लोगाें के अब हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।

178ने छोड़ दिए गांव

जिलापरिषद की ओर से कराए गए सर्वे में सामने आया कि 178 परिवार ऐसे निकले जि